न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरें में है: विवेक तन्खा

जबलपुर। राज्यसभा सदस्य तथा वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने शनिवार को जिला अधिवक्ता संघ द्वारा आयोजित सम्मान समारोह को सम्बोधित करते हुए न्यायपालिका तथा अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता पर जोर दिया । उन्होनें कहा कि आज की परिस्थितियों में न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरें में है। उच्चतम न्यायालय के चार न्यायाधीशों का मीडिया के समक्ष आना यह संकेत है कि न्यायपालिका के कार्यो में हस्तक्षेप हो रहा है। उन्होनें कहा कि मैने जब यह जाना तो मेरे कान खड़े हो गये। यह एक गंभीर समस्या है,इसे छोड़ा नही जा सकता। प्रयास यही होना चाहिये कि सरकार ज्यूडिशियल कामों में हस्तक्षेप न करें। उन्होनें कहा कि यह लड़ाई बहुत लम्बी है। इसमें अधिवक्ताओं को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। अन्यथा इनकी स्वतंत्रता छिन जाएगी और जहां स्वतंत्रता नही वहां न्याय संभव नही है । उन्होनें कहा कि देश को आजादी अधिवक्ताओं की बदौलत मिली है। महात्मा गांधी स्वंय एक प्रमुख अधिवक्ता थे। जिनकी बदौलत देश को आजादी मिली। उन्होनें कहा कि न्यायालयों में इस समय करीब तीन करोड़ मामले लंबित है। जनता को न्याय नही मिल पा रहा है, यह सोचनीय बात है। जनता की परेशानियों के बारे में भी सोचना होगा।
उन्होनें कहा कि जब तक कानून स्वतंत्रता पर निर्भर है। जब तक ज्यूडिशियली स्वतंत्र नही होगी तब तक प्रजातंत्र संभव नही है।