HC ने वॉट्सएप पर भेजे रिलीविंग आदेश पर लगाई रोक

Advertisements

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अतिशेष घोषित किए गए अध्यापक को वॉट्सएप पर भेजे गए रिलीविंग आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। इसी के साथ राज्य शासन सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया गया। इसके लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।

न्यायमूर्ति वंदना कासरेकर की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता पन्ना निवासी कौशल्या कोंदर की ओर से अधिवक्ता सुधा गौतम ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि अतिशेष घोषित किए जाने की कंडिका में स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि पहले वरिष्ठ अध्यापकों को अतिशेष घोषित किया जाएगा। इसके बावजूद अपेक्षाकृत कनिष्ठ अध्यापक याचिकाकर्ता को मनमाने तरीके से अतिशेष घोषित कर रिलीविंग आदेश वॉट्सएप पर जारी कर दिया गया।

बावजूद इसके कि पूर्व में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजय पॉल की एकलपीठ ने 21 दिन में अपील का निराकरण करने के निर्देश जारी किए थे। कलेक्टर और डीईओ ने मनमानी करते हुए याचिकाकर्ता के साथ दुर्भावनापूर्ण व्यवहार किया। इसके तहत आनन-फानन में वॉट्सएप पर कार्यमुक्ति आदेश जारी कर दिया गया। सवाल उठता है कि जब मलखान सिंह जैसे वरिष्ठ अध्यापक मौजूद हैं, तो याचिकाकर्ता को भला कैसे अतिशेष श्रेणी में डाला जा सकता है?

Advertisements