वेटरनरी में आरक्षित ,ओबीसी सीटों पर कर दी सामान्य वर्ग की नियुक्ति

सहायक प्राध्यापकों की भर्ती में गड़बड़झाला
जबलपुर।
नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर में सहायक अध्यापकों की नियुक्तियां अवैध तरीके से विश्वविद्यालय में की गई थी। इन नियुक्तियों में आरक्षण के नियमों का पालन नहीं किया गया। वास्तव में यह नियुक्तियां विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉक्टर एस एस नंदा वर्ष 2015 में की गई थी। परंतु नंदा तो विश्वविद्यालय छोड़ कर चले गए। बात वर्तमान कुलपति डॉ प्रयाग दत्त जुयाल के संज्ञान में लाई गई उन्हें इस बात से अवगत कराया गया कि आरक्षण रोस्टर का पालन किए बगैर 3 अनारक्षित, 6 ओबीसी और एक अनुसूचित जाति को विभिन्न विषयों में उसी वर्ग का पद ना होने के बावजूद नियम विरुद्ध नियुक्ति दी गई, जिसमें आरक्षण एवं संविधान का घोर उल्लंघन हुआ है
कुलपति ने बनाई थी जांच समिति
कुलपति द्वारा मामला जब संज्ञान में आया, तो उनके द्वारा एक जांच समिति गठित की गई तथा जांच समिति में नियमों का उल्लंघन होना पाया गया। नियमानुसार जो भी इस भर्तियों में दोषी हैं उन पर कार्यवाही होना चाहिए तथा जो भी प्रोफेसर और संवैधानिक तौर पर नौकरी कर रहे हैं उन्हें तत्काल नौकरी से निष्कासित कर देना चाहिए था।
दाल में कुछ तो काला है
2015 में जब शिक्षकों की भर्ती हुई उसके उपरांत दो कुलपति के आने के बाद डॉक्टर जुयाल वर्तमान कुलपति हैं और उनके द्वारा जांच समिति में सभी शिक्षकों की भर्ती असंवैधानिक पाई गई है, परंतु अभी तक किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही शिक्षकों के साथ नहीं की गई है एक और जहां डॉक्टर जीवन इमानदारी का दंभ दिखा रहे हैं वहीं दूसरी ओर इस तरह की गलत नियुक्तियों वाले शिक्षकों को वेटनरी प्रशासन बचाने में लगा हुआ है ऐसा लग रहा है कि जरूर इन नियुक्तियों को लेकर लाखों रुपयों का वारा न्यारा हुआ है।
एनएसयूआई करेगा बड़ा आंदोलन
एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव सौरभ गौतम का कहना है कि पूरे प्रकरण की शिकायत हमारे द्वारा लोकायुक्त सहित राज्यपाल व मुख्यमंत्री को दी गई है, यदि यह गलत नियुक्तियां निरस्त नहीं की जाती हैं तो हमारे द्वारा तीव्र आंदोलन किया जाएगा तथा आने वाले वक्त में हमारे द्वारा न्यायालय की शरण ली जाएगी