BHU में आधी रात को बवाल, प्रदर्शन कर रही छात्राओं पर लाठीचार्ज

वाराणसी। छेड़खानी के विरोध में सड़क पर उतरीं छात्राओं की अनसुनी करने और वीसी लॉज पर पहुंचे कुछ छात्र-छात्राओं पर सुरक्षाकर्मियों द्वारा लाठीचार्ज के बाद शनिवार की आधीरात को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर जंग का मैदान बन गया।

हालात काबू में करने के लिए परिसर में घुसी फोर्स को हास्टल के छात्रों का कड़ा विरोध झेलना पड़ा। परिसर की सड़कों पर गुरिल्ला युद्ध की स्थिति बनी रही। इस दौरान हवाई फायरिंग व आंसू गैस दागने के साथ ही पुलिस ने जवाबी पथराव भी किया मगर हालात काबू में नहीं आए।

मारपीट और पथराव के बीच दस बमों के धमाकों से दो-ढाई किलोमीटर का इलाका थर्रा उठा। बवाल के चलते एक दारोगा व सिपाही समेत दर्जनों छात्रों को भी गंभीर चोट आई है। एक व्यक्ति की स्थिति मरणासन्न है। देर रात तक उसकी पहचान नहीं हो सकी थी।

हालात को काबू में करने के लिए जिले के पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौके पर डटे हुए थे मगर फोर्स की भारी कमी के चलते केवल बिड़ला हास्टल में ही फोर्स घुस सकी। हालांकि फोर्स की कमी, आसपास घना अंधकार व इसी बीच लगभग दस बम धमाकों के चलते फोर्स को हास्टल से बाहर निकलने का आदेश देना पड़ा। पुलिस वायरलेस पर लगातार और फोर्स भेजे जाने की डिमांड लगातार कर रही थी।

इस भारी बवाल के बीच सिंहद्वार पर शुक्रवार से ही धरनारत छात्राओं को पुलिस ने खदेड़कर बीएचयू परिसर के भीतर कर दिया। इसके बाद भी सिंहद्वार आधीरात के बाद कई बार छात्रों द्वारा घेरा गया। सिंहद्वार के बाहर और भीतर की इस दोतरफा जंग में पुलिस की कमी बार-बार आड़े आ रही थी जिससे चाहकर भी फोर्स कार्रवाई नहीं कर पा रही थी। इस बीच अधिकारी के ऊपर भी पथराव किया गया। देर रात तक परिसर में बेकाबू हालात संभालने के लिए पुलिस हाथ-पांव मार रही थी।

इसके पूर्व परिसर में छेड़खानी के विरोध में सड़क पर उतरीं छात्राओं का आंदोलन दबाने के लिए दिन में विवि प्रशासन ने हरसंभव हथकंडे अपनाए, पर वे विफल रहे। कुछ छात्राएं धरना के साथ ही दोपहर में भूख हड़ताल पर बैठ गई थीं। उनकी मांग थी कि कुलपति मौके पर आकर उनकी बात व समस्याएं सुनें जबकि प्रशासन का तर्क था कि कुलपति धरनास्थल पर नहीं जाएंगे। दोनों पक्षों की जिद के कारण बीएचयू का माहौल गरम बना रहा। आक्रोशित विद्यार्थियों ने सिंहद्वार पर कुलपति का पुतला भी फूंका। हालांकि, देर शाम कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने त्रिवेणी हॉस्टल में धरना व आंदोलन से अलग हुई कुछ छात्राओं से मुलाकात कर सुरक्षा का भरोसा दिया। कुलपति का पहले एमएमवी में आंदोलित छात्राओं से वार्ता करने का कार्यक्रम था।

यह है मामला –

गौरतलब है कि गुरुवार शाम को विभाग से हास्टल जा रही दृश्य कला संकाय की छात्रा संग भारत कला भवन के पास कुछ युवकों ने छेड़खानी के साथ कपड़े उतारने की कोशिश की थी। किसी तरह हास्टल पहुंची छात्रा के बताने पर त्रिवेणी हास्टल की छात्राएं रात में ही सड़क पर आ गई।

हालांकि मनाने पर रात में वे शांत हो गई थीं, लेकिन शुक्रवार सुबह छह बजे ही त्रिवेणी हास्टल की छात्राओं ने सिंहद्वार पर आंदोलन शुरू कर दिया। उनका कहना था कि चंद मिनट के लिए आकर कुलपति समस्याएं सुन लेते तो वे धरना खत्म कर देतीं लेकिन, उनके न आने पर वे सिंहद्वार से नहीं हटीं। इससे प्रधानमंत्री का दुर्गा व मानस मंदिर जाने का रूट बदलना पड़ा। इतना ही नहीं, बीएचयू प्रशासन की अनदेखी व संवेदनहीनता के चलते छात्राओं ने शुक्रवार की रात सड़क (सिंहद्वार) पर गुजारी।