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सबरीमाला पर स्मृति ईरानी का बयान-हम खून से सना सैनिटरी पैड दोस्त के घर …

न्‍यूज एजेसी । केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का मानना है कि हम सभी को प्रार्थना करने का अधिकार है, लेकिन किसी स्थान को अपवित्र करने का नहीं. सबरीमाला में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से जारी विवाद पर ईरानी ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही.

ईरानी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उनका कुछ कहना उचित नहीं है, क्योंकि वह एक केंद्रीय मंत्री हैं. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दे दी है.

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, “ये तो कॉमन सेंस की बात है. क्या आप पीरियड्स ब्लड से सना हुआ सैनिटरी नेपकिन अपने दोस्त के घर में ले जाएंगे. नहीं ले जाएंगे और क्या आपको लगता है कि ऐसा हमें भगवान के घर यानी मंदिर जाते समय करना चाहिए. यही अंतर है और ये मेरी निजी राय भी है.

स्मृति ईरानी ने अपनी निजी जिंदगी के बारे में बताते हुए कहा कि मैं एक हिंदू घर की बेटी हूं और मैंने एक पारसी शख्स से शादी की है. मुझे यकीन है कि मेरे दोनों बच्चे भी पारसी धर्म का पालन करेंगे.

उन्होंने बताया कि जब भी वह मुंबई के फायर टेंपल में जाती हैं तो अपने बच्चों को अपने पति को सौंप देती हैं क्योंकि उन्हें मंदिर में खड़े होने से मना कर दिया जाता है. स्मृति ने बताया कि वह सड़क पर य गाड़ी में बैठकर अपने पति और बच्चों का इंतजार करती हैं.

पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 13 नवंबर को सुनवाई करेगा
इससे पहले सबरीमाला मंदिर में दर्शन के आखिरी दिन बीते सोमवार को ‘रजस्वला’ आयुवर्ग की एक और महिला ने मंदिर में प्रवेश का प्रयास किया था लेकिन प्रदर्शनकारियों के विरोध के चलते उन्हें वापस लौटना पड़ा. वहीं रात में मंदिर का प्रवेशद्वार बंद होने से पहले ‘रजस्वला’ आयुवर्ग की और महिलाओं के मंदिर आने का प्रयास करने की खबरों के बीच सुरक्षा बढ़ा दी गई थी. बिंदू केरल राज्य परिवहन निगम की बस में पुलिसकर्मियों के साथ सफर कर रही थी.

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जब बस पम्बा पहुंचने वाली थी, ‘नैष्ठिक ब्रह्मचारी’ के मंदिर में 10 से 50 साल की आयु वर्ग की लड़कियों व महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रहे श्रद्धालुओं और बीजेपी कार्यकर्ताओं के एक समूह ने सड़क बाधित कर दी और उन्हें बस से उतरने के लिए बाध्य कर दिया. बता दें कि केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति के खिलाफ कोर्ट में दाखिल की गई पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की तारीख दे दी है. कोर्ट इन याचिकाओं पर 13 नवंबर को सुनवाई करेगा.

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