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मध्यप्रदेश में भावांतर भुगतान योजना पर लग सकता है चुनाव का ग्रहण

भोपाल। भाजपा सरकार का मास्टर स्ट्रोक मानी जा रही भावांतर भुगतान योजना पर चुनाव का ‘ग्रहण” लग सकता है। विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से दो दिन पहले सरकार ने सोयाबीन और मक्का में फ्लैट भावांतर भुगतान योजना लागू करने के आदेश जारी किए थे। इसके हितग्राही मतदाता भी हैं, इसलिए सवाल उठ रहे हैं। वहीं कलेक्टरों ने भुगतान को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय परीक्षण करा रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री जनकल्याण योजना ‘संबल” में भी नए हितग्राहियों को फायदा नहीं मिलेगा।
सूत्रों के मुताबिक मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ऐसी सभी योजनाओं पर नजर रख रहा है जिन पर आचार संहिता लागू होने से कुछ दिन पूर्व ही निर्णय लिए गए हैं और सीधे हितग्राहियों को लाभ पहुंचाने वाली हैं। कांग्रेस भी मुख्यमंत्री असंगठित श्रमिक जनकल्याण योजना ‘संबल” के स्मार्ट कार्ड सहित अन्य योजनाओं पर सवाल उठा चुकी है।
बताया जा रहा है कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में संबल और भावांतर योजनाओं के भुगतान को लेकर परीक्षण करवाया जा रहा है। दरअसल, सोयाबीन और मक्का में फ्लैट भावांतर देने की योजना चार अक्टूबर को लागू करने का फैसला लेते हुए कलेक्टरों को आदेश जारी किए गए।
छह अक्टूबर विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ आदर्श आचार संहिता लागू हो गई। 29 सितंबर तक योजना के लिए किसानों को पंजीयन कराया गया और राजस्व विभाग 10 अक्टूबर तक किसानों द्वारा घोषित रकबे का सत्यापन कराया जाएगा। योजना के तहत ब्रिकी की शुरुआत 20 अक्टूबर से होगी और भावांतर की राशि तय करने का अधिकार मुख्यमंत्री को दिया गया है।
प्रदेश कांग्रेस की ओर से चुनाव कार्य के लिए अधिकृत प्रवक्ता जेपी धनोपिया ने बताया कि शुक्रवार को एक बार फिर संबल योजना को लेकर शिकायत की है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने लिखित में आवेदन मांगा है। पहले भी संबल स्मार्ट कार्ड को लेकर शिकायत की जा चुकी है, जिसका जवाब अभी तक नहीं मिला है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने इस मामले में सामान्य प्रशासन विभाग से रिपोर्ट मांगी है।
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