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गोलबाजार रामलीला- गंगा पार कराने केवट ने रखी थी ये शर्त, पद कमल धोइ चढ़ाई नाव न नाथ उतराई चहौं..

कटनी। पद कमल धोइ चढ़ाइ नाव न नाथ उतराई चहौं। मोहि राम राउरि आन दसरथसपथ सब साची कहौं। राम लखन को गंगा पार कराने केवट की इस शर्त के बाद भगवान राम केवट को पैर पखारने की अनुमति देते हैं। केवट पैर धोकर सात जन्मों तक तर जाता है। नाव की उतराई लेने से केवट इंकार करता है। केवट राम लक्ष्मण संवाद की इस सुंदर लीला का मंचन कल गोलबाजार रामलीला में देर रात तक श्रद्धालुओं को लुभाता रहा। पं. सुनील तिवारी, सुशील तिवारी के निर्देशन में ब्यास जी की सुमधुर आवाज से मंचन का जीवंत चित्रण लोगों को मंत्र मुग्ध कर गया। गंगा पार कराने के बाद केवट ने कहा कि भगवान मैं उतराई नहीं ले सकता आज मैंने गंगा पार कराई कल जब मैं आपके पास आउं तो मुझे भवसागर पार कराना। केवट के इस मार्मिक प्रसंग ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। कमेटी की ओर से सचिव भरत अग्रवालए टिल्लू सिंघानियां, रवि खरे, शरद अग्रवाल, संतोष जायसवाल, राजेंद्र सोंधिया, रणवीर कर्ण, आशुतोष शुक्ला, संजय चौदहा बेबू, मनीष चौबे, नरेश सोनी, अरशद मंसूरी, अंतिम गुप्ता, वेंकटेश मिश्रा, संजय गिरी, सहित कमेटी के सदस्य एवं गणमान्यजन उपस्थित थे। इसके पूर्व कल यहां कैकई मंथरा संवाद की लीला का सुंदर मंचन किया गया। रावण की कैद में रह रहे देवता मां सरस्वती से आग्रह करते हैं कि श्री राम का राज्याभिषेक हुआ तो रावण का विनाश संभव कैसे होगा। मां सरस्वती मंथरा की जिव्हा में विराजमान होती हैं और फिर राम के राज्याभिषेक में बाधा बनी मंथरा की कुटिल चालों में घिरी कैकई राजा दशरथ से राम को 14 वर्षों का वनवास तथा भरत के लिए राजगद्दी की मांग कर राजा दशरथ सहित समूची अयोध्या नगरी को विराट दुख में समाहित कर देती हैं। आज यहां दशरथ मरण तथा भरत मिलाप की लीला का सुंदर मंचन किया जाएगा

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