समाज के डर से बच्ची को झाड़ियों में फेंककर मां ने रची चोरी की कहानी

बैतूल। जिस बच्ची को अपनी कोख में 9 महीने तक रखा था, उसे जन्म देने के 4 दिन बाद ही सामाजिक लोक-लाज के कारण मरने के लिए झाड़ियों में फेंक दिया। इसकेे बाद जन्म देने वाली मां ने उसके चोरी हो जाने की झूठी कहानी रची। पुलिस ने 4 दिन पहले जन्मींं बालिका को चुराने की सूचना पर खोजबीन शुरू की और मां से पूछताछ की तो 16 घंटे बाद उसने सच उगल दिया।

पुलिस ने झाड़ियों में पड़ी बच्ची को बरामद कर तत्काल ही जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया। पुलिस ने जन्म के बाद बच्ची को मौत के मुंह में फेंकने वाली मां के खिलाफ अपराध दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है।

दसअसल जिला अस्पताल में ग्राम झगड़िया की एक महिला को प्रसव के लिए भर्ती किया गया था। उसने 3 अक्टूबर को बालिका को जन्म दिया और 7 अक्टूबर को जब उसकी छुट्टी हुई तो उसने अचानक बालिका के चोरी हो जाने की शिकायत कर दी। उसने एक युवती पर मदद करने के बहाने बच्ची को उसके पास से लेने और कुछ देर बाद फरार हो जाने का आरोप लगाया। अस्पताल से बच्ची के चोरी होने की खबर से हड़कंप मच गया और पुलिस सक्रियता से तलाश में जुट गई।

बच्ची को जन्म देने वाली मां की जानकारी पर सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और पुलिस उसे लेकर आमला भी गई लेकिन कुछ सुराग नहीं मिल पाया। बार-बार बयान बदलने के कारण जब देर रात तक पुलिस को कोई कामयाबी नहीं मिल पाई तो उस पर ही संदेह होने लगा। कोतवाली पुलिस ने जब सोमवार की सुबह दोबारा उससे पूरी घटना के बारे में पूछा तो वह टूट गई और उसने बच्ची को अस्पताल के पीछे झाड़ियों में फेंकने की जानकारी दी। पुलिस उसे तत्काल लेकर मौके पर पहुंची तो वहां बच्ची स्वस्थ अवस्था में मिली। उसे अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती करा दिया गया है।

अप्रैल में हुई थी शादी

4 दिन पहले जन्म लेने वाली बच्ची को झाड़ियों में फेंकने वाली महिला का विवाह इसी साल 25 अप्रैल को झगड़िया में हुआ था। शादी के करीब 5 माह बाद ही बेटी का जन्म हो जाने से वह समाज में बदनाम हो जाएगी इसी डर के कारण उसने ऐसा कदम उठा लिया। पुलिस के अनुसार महिला का कहना है कि वह बीमारी का उपचार कराने के लिए अस्पताल आई थी जहां प्रसव का समय करीब आ जाने पर भर्ती कर लिया गया था। कोतवाली पुलिस ने महिला के खिलाफ धारा 317 के तहत प्रकरण दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।

संदेह के घेरे में यह कहानी

बच्ची को अस्पताल के पीछे झाड़ियों में फेंक देने की जो कहानी महिला ने पुलिस को बताई है वह भी संदेह के दायरे में आ रही है। रविवार की शाम करीब 4.30 बजे बच्ची को यदि फेंक दिया जाता तो 16 घंटे तक उसे न मच्छर काटते हैं और न ही चीटियां उसके शरीर पर डंक मारती रही। आवारा कुत्ते या अन्य कोई जानवर भी उस तक कैसे नहीं पहुंचा। इतना ही नहीं रात भर ठंड में मात्र 4 दिन की बच्ची पड़ी रही और सुबह वह स्वस्थ अवस्था में कैसे मिली इस सवाल का जवाब पुलिस तलाश रही है।

मां ने ही बच्ची को झाड़ियों में फेंका था

अस्पताल से बच्ची के चोरी होने की झूठी कहानी गढ़कर उसे झाड़ियों में फेंकने वाली मां के खिलाफ अपराध दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की विवेचना की जा रही है जिसमें सारी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी – सुनील लाटा, टीआई कोतवाली बैतूल

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