पिता को मुखाग्रि देकर बेटी ने निभाया पुत्रवत धर्म, अंतिम संस्कार में लोगों की आंखे हुंई नम

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कटनी। सामाजिक रीतियों में व्यक्ति का पुत्र न हो तो कहा जाता है अंतिम समय मुखाग्रि कौन देगा? लेकिन इस रूढ़िवादिता को अब लड़कियों ने तोड़ा है। पुत्रवत धर्म को निभाने में लड़कियों को कोई संकोच नहीं। ऐसा ही उदाहण आज देखने को मिला जब अपने दिवंगत पिता को पुत्री ने मुक्तिधाम में सभी संस्कारों को पूर्ण कर मुखाग्रि दी, तो लोगों ने कहा कि बेटी की महिमा सचमुच अपरंपार है।

केवल लड़कों की चाह रखने वालों के लिए यह एक कड़ा संदेश भी है कि सिर्फ बेटों के कार्य ही नहीं बेटों को फर्ज भी अदा करने बेटियां पीछे नहीं। दरअसल आज मांझी समाज कटनी के सक्रिय सदस्य गोपाल रैकवार का 56 वर्ष की आयु में निधन हो गया। स्व. गोपाल रैकवार लंबे समय से बीमार थे। उनकी सिर्फ दो ही बेटियां थीं।

मृत्यु के पश्चात मुखाग्रि देने के लिए समाज में विचार विमर्स शुरू हुआ। पुत्रवत किसी रिस्तेदार से मुखाग्रि देने की तैयारियों के बीच उनकी छोटी बेटी निकिता रैकवार ने अंतिम संस्कार के सभी संस्कार को पूरा करने की इच्छा जताई पहले तो सामाजिक लोगों को यह अटपटा लगा लेकिन फिर सभी बड़े बुजर्गों ने बेटी के साहस को स्वीकार किया। सामाजिक कुरीतियों से हटकर छोटी बेटी निकिता ने मुक्ति धाम में मुखाग्नि देकर पुत्री होकर भी पुत्र धर्म को निभाग कर सभी के सामने मिशाल पेश की। बड़ी संख्या में स्व. गोपाल रैकवार की अंतिम यात्रा में लोग शामिल हुए।

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