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शोध में खुलासा-मोबाइल स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से बच्चों के मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव

टोरंटो। यूं तो समय-समय पर मोबाइल का जरूरत से ज्यादा प्रयोग के जोखिम को शोधकर्ता उजागर करते रहते हैं, लेकिन हाल ही में किए गए एक अध्ययन में स्पष्ट हुआ है कि मोबाइल फोन पर अधिक वक्त बिताने से बच्चों के दिमाग पर बुरा असर पड़ता है।

शोध में कहा गया है कि अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को प्रतिदिन दो घंटे से अधिक मोबाइल पर वक्त नहीं बिताने दें। उन्हें इससे कम वक्त मोबाइल फोन के साथ बिताने दिया जाए, साथ ही उन्हें एक अच्छी नींद दी जाए तथा शारीरिक गतिविधियों में व्यस्त रखा जाए, तो उन्हें दिमागी रूप से अत्यधिक कुशाग्र बनाया जा सकता है।

दि लैंसेट चाइल्ड एंड एडोलेसेंट हेल्थ जर्नल में छपे इस अध्ययन में कहा गया है कि अगर मोबाइल पर बच्चों को निश्चित समय बिताने दिया जाए और उन्हें बेहतर नींद मिले, तो इसका सीधा संबंध उनके बढ़े हुए ज्ञान से होता है, जबकि उनके शारीरिक स्वास्थ्य के लिए शारीरिक सक्रियता जरूरी होती है।

कनाडा के शोध संस्थान की सीएचईओ जेरेमी वाल्श ने बताया, व्यवहार और प्रतिदिन की गतिविधियों का संबंध बच्चों के ज्ञान और मस्तिष्क के विकास से होता है। शारीरिक सक्रियता, उचित व्यवहार और नींद से संयुक्त रूप से ज्ञान में बढ़ोतरी होती है।

वाल्श ने कहा, प्रमाणों से पता चलता है कि अच्छी नींद एवं शारीरिक सक्रियता का संबंध अकादमिक प्रदर्शन से होता है, जबकि शारीरिक सक्रियता का संबंध बेहतर प्रतिक्रिया का समय, सावधानी, स्मरण शक्ति और रुकावट से होता है।

उन्होंने कहा कि चूंकि यह शोध अभी प्रारंभिक चरण में है और ऐसा प्रतीत होता है कि यह अलग-अलग तरह की स्क्रीन आधारित गतिविधियों पर आधारित है, इसलिए इसमें सुस्त व्यवहार के साथ संबंध अस्पष्ट है। अध्ययन में अमेरिका के अलग-अलग स्थानों से 4520 छात्रों को शामिल किया गया। बच्चों और उनके अभिभावकों ने प्रश्नोत्तरी को पूरा किया और बच्चों की शारीरिक गतिविधि, नींद तथा स्क्रीन टाइम को इसमें मापा गया। इसमें बच्चों का परोक्ष ज्ञान भी आंका गया, जिसमें भाषा की क्षमता, एपिसोडिक मेमोरी, एग्जीक्यूटिव फंक्शन, सावधानी, काम के दौरान स्मरण एवं प्रोसेसिंग स्पीड को आंका गया।

इस अध्ययन में पूरे घर की आय, अभिभावकों एवं बच्चे की शैक्षणिक योग्यता, परिपक्व विकास, बॉडी मास इंडेक्स को भी शामिल किया गया। साथ ही यह भी देखा गया कि बच्चे को कभी मस्तिष्क की गंभीर चोट से नहीं गुजरना पड़ा है। वाल्श ने कहा, हमने पाया कि दो घंटे से अधिक स्क्रीन पर समय बिताने से बच्चों के ज्ञान का विकास प्रभावित होता है।

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