जिसने मोदी और नीतीश को पहुंचाया सत्ता के शिखर तक-प्रशांत किशोर

नई दिल्ली। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की चुनावी रणनीति के अहम रणनीतिकार प्रशांस किशोर अब सक्रिय राजनीति में एंट्री कर ली है। प्रशांत किशोर अपना सियासी सफर जनता दल यूनाइटेड से शुरू करने जा रहे हैं। पटना में जेडीयू की कार्यकारिणी में खुद सीएम नीतीश कुमार की मौजूदगी में वो पार्टी की सक्रिय सदस्यता लेंगे।

खुद प्रशांत किशोर ने पहले सक्रिय राजनीति में आने की बात से इंनकार किया था, लेकिन आज ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। यूनिसेफ की नौकरी छोड़कर प्रशांत किशोर आज देश के प्रधानमंत्री मोदी के संपर्क में आए और कैसे एक कुशल चुनावी रणनीतिकार के रुप में उन्होंने खुद को स्थापित, आइए जानते हैं उनके जुड़ी खास बातें

  • प्रशांत किशोर बिहार के बक्सर जिले के रहने वाले हैं। उनके पिता श्रीकांत पांडे पेशे से डॉक्टर रहे हैं और रिटायरमेंट के बाद आज इसी शहर में अपना क्लीनिक चलाते हैं।

  • प्रशांत किशोर की शुरुआती पढ़ाई बिहार में ही हुई है। उसके बाद वो इंजीनियरिंग के लिए हैदराबाद चले गए थे। वहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद यूनिसेफ में नौकरी करने लगे। यहां उन्होंने ब्रांडिंग का काम देखा।

  • वो साल 2011 में पीएम नरेंद्र मोदी के उस वक्त संपर्क में आए, जब वो गुजरात के सीएम थे और ‘वाइब्रेंट गुजरात’ आयोजन की ब्रांडिंग का का काम संभाला। इस दौरान प्रशांत किशोर तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी के करीब आए और फिर उन्होंने मोदी के लिए काम करना शुरू कर दिया।

  • 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के रणनीति बनाई।

  • आठ साल तक संयुक्त राष्ट्र में बतौर हेल्थ एक्सपर्ट रह चुके हैं।

  • बतौर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को 2014 के आम चुनाव में बड़ी पहचान मिली। जब भाजपा ने उनके सहारे चुनाव लड़ा और ऐतिहासिक जीत दर्ज की। कहा जाता है कि भाजपा की ऐतिहासिक जीत के पीछे प्रशांत किशोर की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा था।

  • ऐसा भी कहा जाता है कि 2014 के आम चुनाव में पीएम मोदी को लेकर चलाए गए दो कैंपेन ‘चाय पर चर्चा’ और ‘थ्री-डी नरेंद्र मोदी लाइव’ के पीछे भी प्रशांत किशोर का ही दिमाग था।

  • 2014 के आम चुनाव में भाजपा को सत्ता के शिखर तक पहुंचाने के बाद उनकी पटरी पार्टी के साथ नहीं बैठी और उन्होंने बिहार का रुख किया। यहां प्रशांत किशोर ने 2015 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के लिए काम किया और नीतीश कुमार के लिए तैयार किए गया खास कैंपेन ‘बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है’ काफी सुर्खियों में रहा था। उनकी कुशल रणनीति की बदौलत यहां भाजपा को हराकर महागठबंधन सत्ता में आई।

  • 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सत्ता में पहुंचाने में अहम भूमिका निभा चुके हैं।

  • इसके बाद प्रशांत किशोर की नीतीश कुमार से नजदीकी बढ़ गई। हालांकि नीतीश कुमार के भाजपा से हाथ मिलाने के बाद जरूर दोनों के रिश्तों में खींचतान की बात सामने आई थी। लेकिन आज जब वो नीतीश कुमार की मौजूदगी में जेडीयू के जरिए सक्रिय राजनीति में एंट्री कर रहे हैं तो ये इस पर विराम लग गया है।