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नेट एक्रीडिटेशन की तैयारियों की बात पर बिफरे प्राचार्य  

जबलपुर। शासकीय विज्ञान महाविद्यालय में  सब कुछ ठीक नहीं  है।  कॉलेज के नए एक्रीडिटेशन  की तैयारियों की पर प्रबंधन का गोलमोल जबाव पच नहीं रहा। तैयारियों को लेकर प्रबंधन इच्छुक नहीं दिख रहा है।  राष्ट्रीय मूल्यांकन परिषद के निरीक्षण की दिनांक का पता ही नहीं।
 जब इस बारे में  प्राचार्य  से  पूछा गया कि कब तक नेट एक्रीडिटेशन  की दिनांक निर्धारित होगी तो नियमों और मापदंडों का हवाला देते हुए प्राचार्य का कहना था कि अभी कुछ भी निर्धारित नहीं है आने वाले 3 महीनों में निरीक्षण की दिनांक आ सकती है।
दिनांक का पता नहीं और योजनाओं का हो रहा है बंदरबांट
नेट एक्टिवेशन की दिनांक पर प्राचार्य  गुस्से में दिखे से पूछने पर कि ऐसी कौन सी योजनाएं और प्रत्यायन परिषद के निरीक्षण से पहले कॉलेज में विकास विकास कार्य हो रहे हैं जिससे कि संस्था ने एग्री डिक्शन में पास हो जिसके जवाब में प्रचार महोदय भड़क जाते हैं एवं जैसा करना हो वैसे वैसा कर लो की बात कहकर सवाल का जवाब नहीं देते हैं
जैसा की ज्ञात हो कि संस्था में विकास के नाम पर नेक एग्रीडेशन के नाम पर पैसा तो बहुत आ रहा है पर योजनाओं का पैसा किधर जा रहा है इसका कोई कहीं हिसाब नहीं दिखता
संस्था नेक एक्रीडिटेशन    से दूर क्यों
1. शैक्षणिक प्रक्रियाओं में संस्था का प्रदर्शन स्तरहीन
2 शिक्षण अधिगम अधिगम एवं मूल्यांकन जीरो
3. संकाय सदस्यों का अनुसंधान कार्य व प्रकाशन स्तर शून्य
4. बुनियादी सुविधाओं एवं संसाधनों में गुणवत्ता का अभाव
5. संगठन प्रशासन व्यवस्था छात्र सेवाओं से दूर दूर तक कोई सरोकार नहीं
क्या है नेक
नेक एक संस्थान है जो भारत की उच्च शिक्षा संस्थानों का आकलन तथा मान्यता का कार्य करती है मूल्यांकन एवं प्रत्यायन की मूलतः किसी भी शैक्षणिक संस्था की गुणवत्ता की स्थिति को समझाने के लिए प्रयोग किया जाता है
मानक स्तर उसे संस्था का दूर-दूर तक नहीं है कोई भी सरोकार
अगर हम बात करें कि नए के मानक स्तर की तो हम देखते हैं कि संस्था नेट एजुकेशन के लिए प्रमाणन एजेंसी के द्वारा निर्धारित गुणवत्ता के मानकों को किसी भी स्तर तक पूरा नहीं करती है
संस्था की समस्याएं
1. फ्लोरिंग
कॉलेज प्रांगण में दूर-दूर तक कहीं भी फ्लोरिंग सही प्रकार से नजर नहीं आती है हो सकता है फ्लोरिंग के नाम पर कई बार पैसा तो कॉलेज के खाते में आया भी होगा परंतु फ्लोरिंग किन प्रशासनिक अधिकारियों के घर में हो गई यह सोचनीय विषय है
2. पेंट बॉस
जो समस्या फ्लोरिंग में दिख रही है वही समस्या संस्था में दीवारों पर कहीं भी पेंट वश में भी दिखती है संस्था की दीवारों पर नाम मात्र का पेंट वाश  है जो अब धीरे-धीरे निकलने लगा है
3. बजबजाते वाटर कूलर
सामान्यता वाटर कूलर में अंदर झांकने से गंदगी का अलग ही नजर नजारा देखने को मिलता है और इसी पानी को पीकर संस्था के छात्र विभिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रसित होते नजर आ रहे हैं
और भी छात्र हित में कई समस्याएं हैं जिनके बारे में कॉलेज प्रबंधन कुछ नहीं कर रहा है
संस्था में पूर्व में हो चुका है फर्नीचर घोटाला
 10,00000 का फर्नीचर घोटाला संस्था में 2016 में सेमिनार हॉल में सोफा मेज कुर्सियां लाने के नाम पर किया गया था जनभागीदारी समिति द्वारा यह जांच  जब  समिति को  सौंपी गई तो जांच समिति में भी प्राचार्य एवं उनके स्टाफ को दोषी पाया गया था परंतु ढीली प्रशासनिक व्यवस्था के चलते जांच कहीं न कहीं अधूरी रह गई तथा निलंबित प्राचार्य को पुनः  बहाल कर दिया गया।