रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इस वर्ष की शुरुआत में प्रधानमंत्री के समक्ष भारतीय रेल की गई-गुजरी सिग्नल प्रणाली के नवीनीकरण का प्रस्ताव रखा था। उनका कहना था कि मौजूदा सिग्नल प्रणाली ट्रेनों की रफ्तार में बाधक होने के साथ-साथ ट्रेनों की लेटलतीफी और हादसों के लिए जिम्मेदार है।

इसलिए इसके स्थान पर हमें अत्याधुनिक यूरोपीय ट्रेन कंट्रोल सिस्टम-2 सिग्नल प्रणाली को अपनाना चाहिए। यह प्रणाली तीनों समस्याओं से एक साथ निजात दिलाने में सक्षम है। इस संबंध में गोयल ने सार्वजनिक क्षेत्र की दो कंपनियों- पावरग्रिड और रेलटेल के अलावा कुछ बड़ी विदेशी कंपनियों का नाम सुझाया था। उनका मानना था कि यदि इन कंपनियों को अनुबंध दिए जाएं तो रेलवे को काफी बचत हो सकती है।

सूत्रों के अनुसार, संशोधित प्रस्ताव के तहत नई सिग्नल प्रणाली होगी तो यूरोपीय ट्रेन कंट्रोल सिस्टम-2 की तर्ज पर ही। लेकिन उसके कार्यान्वयन में विदेशी कंपनियों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र ही नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र की देशी कंपनियों को भी मौका दिया जाएगा। कैबिनेट नोट को हरी झंडी मिलते ही प्राथमिकता के आधार पर रूटों का चयन कर वैश्विक टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे।

क्या है यूरोपीय ट्रेन कंट्रोल सिस्टम-2

यूरोपीय ट्रेन कंट्रोल सिस्टम-2 में ट्रेनों का संचालन लंबे ब्लॉकों के बजाय अपेक्षाकृत छोटे ब्लॉकों पर किया जाता है। जिससे दो ट्रेनों के बीच मात्र 500 मीटर का अंतराल रखने की जरूरत पड़ती है। इससे किसी रूट पर एक ट्रेन के प्रस्थान के एक मिनट बाद ही दूसरी ट्रेन रवाना की जा सकती है। मौजूदा ऑटोमैटिक सिग्नल प्रणाली में दो ट्रेनों के बीच कम से कम दस मिनट अथवा बीस किलोमीटर का अंतराल रखना पड़ता है।

दिल्ली-मुगलसराय रूट का किया है चयन

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, रेलवे बोर्ड ने नई सिग्नल प्रणाली के लिए पहले रूट के तौर पर सर्वाधिक व्यस्त रूटों में एक दिल्ली-मुगलसराय रूट का चयन कर लिया है। बोर्ड का मानना था कि सिग्नल प्रणाली बदलने से इस रूट पर लाइन क्षमता में 50 फीसद तक की बढ़ोतरी हो जाएगी। इससे ट्रेनों की रफ्तार बढ़ने के साथ संरक्षा और समय पालन में भारी सुधार होगा। माना जाता है कि सबसे पहले इसी रूट के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे।