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MP में बनेंगा देश का पहला ओरल हैल्‍थ बैंक,जिलेवार 1200 लोगों का होगा डेन्‍टल चैकअप

इंदौर। दंत रोगों का पता के लिए लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग देश का पहला ओरल हेल्थ बैंक प्रदेश में बनाने जा रहा है। इसमें दांत की बीमारियों और डॉक्टर्स की आवश्यकता का जिलावार डेटा तैयार किया जाएगा, ताकि बेहतर इलाज मुहैया हो सके। 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत राष्ट्रीय ओरल हेल्थ प्रोग्राम शुरू किया गया। प्रदेश में लगातार बढ़ रहे दंत रोगी और कम होते चिकित्सक ओरल हेल्थ बैंक बनाने का कारण बने हैं। इसका उद्देश्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर भी दंत चिकित्सकों की नियुक्ति व सुविधाएं उपलब्ध करवाना है।
सर्वे के बाद जिलावार दांतों की बीमारी व मरीजों की संख्या, एडवांस डेंटल चेयर, उपकरणों की आवश्यकता आदि का डेटा इकट्ठा किया जाएगा। एम्स भोपाल में बैंक बनाने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया जा रहा है। हर जिले के सरकारी अस्पताल के दंत चिकित्सक इसमें शामिल हो रहे हैं। बैंक के लिए हर जिले से 1200 मरीजों की जांच की जाएगी। इसके लिए उम्र का निर्धारण किया गया है।

एम्स भोपाल व राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भोपाल की निगरानी में 5 से 12, 35 से 44 और 65 से 74 साल तक के लोगों का सर्वे होगा। तीन माह में इसे पूरा कर रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर एक दंत चिकित्सक होना अनिवार्य है, जबकि अभी तक प्रदेश के जिला व सिविल अस्पतालों में ही नियुक्ति हो सकी है।

इसलिए तैयार होगा डेटा : प्रदेश में कई साल से ओरल हेल्थ सर्वे नहीं हो सका सका है। ओरल हेल्थ डेटा बैंक बनाने का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में दांत संबंधी कौन सी बीमारी अधिक है, यह देखना है। इसके तहत ओरल कैंसर, पायरिया सहित अन्य बीमारियों के रोगियों का पता लगाया जाएगा।

बीमारियों का पता लगाने में मदद

यह देश का पहला ओरल हेल्थ डेटा बैंक प्रोग्राम है। इससे बीमारियों का पता लगाने के साथ इलाज की व्यवस्था भी हो सकेगी। हर जिले से डेटा तैयार किया जा रहा है। चिकित्सकों की भर्ती और सुविधाओं को पूरा करने में भी इससे मदद मिलेगी। – डॉ. दिलीप हेड़ाऊ, नोडल, स्टेट ओरल हेल्थ प्रोग्राम