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हरतालिका तीज पर बाजार में रौनक-कल घर-घर होगा रतजगा पूरी रात शिव पार्वती की आराधना

कटनी। हिन्दू धर्म को मानने वाली महिलाओं में हरतालकिा तीज विशेष महत्व है। इस दिन गौरी शंकर की पूजा का विधान है। मान्यता है कि हरतालिका तीज का व्रत करने से सुहागिन महिला के पति की उम्र लंबी होती है जबकि कुंवारी लड़कियों को मनचाहा वर मिलता है। कटनी में भी इस व्रत को कल महिलाएं रख कर पति की दीर्घायु तथा सौभाग्य की कामना के साथ करेंगी। आज दिन भी तीजा की तैयारियों में महिलाएं व्यस्त रहीं। बाजार में तीजा से जुड़ी साम्रगियों की सजी दुकानों के साथ रौनक नजर आ रही थी। कल सुबह से शुष् होने वाला व्रत पूरी रात रखा जाएगी इस दिना महिलाएं पानी तक नहीं पीएंगी। देर रात चार पहरों में पूजन होगी। जगह जगह रतजगा होगा।

 


हरतालिका तीज की तिथि और शुभ मुहूर्त
तृतीया तिथि प्रारंभ 11 सितंबर 2018 को शाम 6 बजकर 4 मिनट
तृतीया तिथि समाप्त 12 सितंबर 2018 को शाम 4 बजकर 7 मिनट
प्रातः काल हरतालिका पूजा मुहूर्त 12 सितंबर 2018 की सुबह 6 बजकर 15 मिनट से सुबह 8 बजकर 42 मिनट तक
हरतालिका तीज का व्रत कैसे करें
हरतालिका तीज का व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है यह निर्जला व्रत है यानी कि व्रत के पारण से पहले पानी की एक बूंद भी ग्रहण करना वर्जित है। व्रत के दिन सुबह सवेरे स्नान करने के बाद उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्येष् मंत्र का उच्चारण करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है। इस व्रत को सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं रखती हैं लेकिन एक बार व्रत रखने के बाद जीवन भर इस व्रत को रखना पड़ता है। अगर महिला ज्यादा बीमार है तो उसके बदले घर की अन्य महिला या फिर पति भी इस व्रत को रख सकता है
हरतालिका तीज की व्रत कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शिव जी ने माता पार्वती जी को इस व्रत के बारे में विस्तार पूर्वक समझाया था। मां गौरा ने माता पार्वती के रूप में हिमालय के घर में जन्म लिया थाण् बचपन से ही माता पार्वती भगवान शिव को वर के रूप में पाना चाहती थीं और उसके लिए उन्होंने कठोर तप किया 12 सालों तक निराहार रह करके तप कियाण्।

एक दिन नारद जी ने उन्हें आकर कहा कि पार्वती के कठोर तप से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु आपकी पुत्री से विवाह करना चाहते हैं। नारद मुनि की बात सुनकर महाराज हिमालय बहुत प्रसन्न हुए। उधर भगवान विष्णु के सामने जाकर नारद मुनि बोले कि महाराज हिमालय अपनी पुत्री पार्वती से आपका विवाह करवाना चाहते हैं। भगवान विष्णु ने भी इसकी अनुमति दे दी फिर माता पार्वती के पास जाकर नारद जी ने सूचना दी कि आपके पिता ने आपका विवाह भगवान विष्णु से तय कर दिया है। यह सुनकर पार्वती बहुत निराश हुईं उन्होंने अपनी सखियों से अनुरोध कर उसे किसी एकांत गुप्त स्थान पर ले जाने को कहा।

माता पार्वती की इच्छानुसार उनके पिता महाराज हिमालय की नजरों से बचाकर उनकी सखियां माता पार्वती को घने सुनसान जंगल में स्थित एक गुफा में छोड़ आईं। यहीं रहकर उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप शुरू किया जिसके लिए उन्होंने रेत के शिवलिंग की स्थापना की। संयोग से हस्त नक्षत्र में भाद्रपद शुक्ल तृतीया का वह दिन था जब माता पार्वती ने शिवलिंग की स्थापना की। इस दिन निर्जला उपवास रखते हुए उन्होंने रात्रि में जागरण भी किया।

उनके कठोर तप से भगवान शिव प्रसन्न हुए माता पार्वती जी को उनकी मनोकामना पूर्ण होने का वरदान दिया। अगले दिन अपनी सखी के साथ माता पार्वती ने व्रत का पारण किया और समस्त पूजा सामग्री को गंगा नदी में प्रवाहित करके साथ माता पार्वती ने व्रत का पारण किया और समस्त पूजा सामग्री को गंगा नदी में प्रवाहित कर