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पहले जैविक माता पिता ने छोडा अब नियमों के चक्रव्यूह में फंसा 9 माह का मासूम

इंदौर। नौ महीने का एक बच्चा दो संस्थाओं की वजह से गोद नहीं जा पा रहा है। 19 फरवरी को दो महीने का अनाथ बच्चा बाल कल्याण समिति धार के माध्यम से इंदौर की संजीवनी संस्था में भर्ती करवाया गया था। किशोर न्याय अधिनियम के मुताबिक उसके संबंध में तुरंत अखबार में विज्ञप्ति जारी की गई लेकिन तीन महीने तक जैविक माता-पिता ने दावेदारी नहीं जताई। इसके बाद बाल कल्याण समिति को कानूनी रूप से बच्चे को निराश्रित घोषित करना था, ताकि किसी निसंतान दंपती को गोद दिया जा सके। हालात ये हैं कि चार महीने से बाल कल्याण समिति ने उसे निराश्रित घोषित नहीं किया। इसके चलते उसे माता-पिता और परिवार का प्यार नहीं मिल पा रहा है।

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बताया गया है कि दो महीने का बच्चा धार के अस्पताल में लावारिस मिला था। अगर समय रहते धार बाल कल्याण समिति निराश्रित घोषित करने की प्रक्रिया पूरी कर देती तो अब तक बच्चा गोद चला गया होता। किशोर न्याय अधिनियम के अनुसार निराश्रित घोषित होते ही बच्चे का नाम कारा की वेबसाइट पर ऑनलाइन हो जाता है। इसके बाद वह गोद लिए जाने के लिए मुक्त रहता है। गौरतलब है कारा की वेबसाइट पर एक हजार से ज्यादा दंपती बच्चा गोद लेने के लिए कतार में हैं।

सोमवार को हो जाएगा मुक्त

बाल कल्याण समिति, धार के सदस्य नवीन भंवर के मुताबिक बच्चा हमारे माध्यम से इंदौर की संस्था में भेजा गया था। इसमें संजीवनी संस्था ने देर की है। संस्था ने विज्ञप्ति गलत तरीके से जारी की। वह इंदौर बाल कल्याण समिति से निराश्रित घोषित करवाना चाह रही थी जबकि यह नियम विरुद्ध है। 7 सितंबर को धार में विज्ञप्ति जारी कर एक महीना पूरा हुआ है। सोमवार को बच्चे को कानूनी रूप से मुक्त घोषित कर देंगे। उधर, संजीवनी की आशा सिंह ने बताया कि धार की समिति को हमने तय समयसीमा में जानकारी दे दी थी।