छठ पर्व: 34 वर्ष बाद बन रहा है महा संयोग, जानें कैसी रहेगी हलचल

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छठ पर्व बिहार का सबसे लोकप्रिय त्यौहार है। यह दीवाली के छठे दिन शुरू होता है। इसलिए इसे छठ पर्व कहा जाता है। छठ पर्व का पहला दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी नहाय-खाय के रूप में मनाया जाता है। सबसे पहले घर की सफाई कर उसे पवित्र बनाया जाता है। इसके बाद छठव्रती स्नान कर पवित्र तरीके से बने शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरूआत करते हैं।

घर से सभी सदस्य व्रती के भोजनोपरांत ही भोजन ग्रहण करते हैं। भोजन के रूप में कद्दू-दाल और चावल ग्रहण किया जाता है। यह दाल चने की होती है दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल पंचमी को व्रतधारी दिन भर का उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करते हैं। इसे खरना कहा जाता है। खरना का प्रसाद लेने के लिए आसपास के सभी लोगों को निमंत्रित किया जाता है। इस दौरान पूरे घर की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को दिन में छठ प्रसाद बनाया जाता है। शाम को परिवार तथा पड़ोस के सारे लोग व सभी छठ व्रत रखने वाले लोग अस्त होते भगवान सूर्य को तालाब या नदी किनारे इकट्ठा होकर अर्घ्य देते हैं। चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

34 वर्ष बाद बन रहा है महा संयोग:

छठ महापर्व 24 अक्तूबर से शुरू हो रहा है। पहले दिन मंगलवार की गणेश चतुर्थी है। पहले दिन सूर्य का रवियोग है। ऐसा महायोग 34 वर्ष बाद बना है। रवियोग में छठ की पूजा विधि-विधान से शुरू करने से सूर्य देव हर कठिन से कठिन मनोकामना भी पूर्ण करते हैं। चाहे कुंडली में कितनी भी बुरी दशा चल रही हो, सूर्य पूजन से सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी।

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