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अब छात्रों की नजर छात्रसंघ चुनाव पर, आशंकित है और असमंजस भी

जबलपुर। सभी कालेजों में नया शिक्षण सत्र शुरू हुए दो महीने बीत चुके हैं। अब छात्रों की नजर छात्रसंघ चुनाव पर है। वे इन चुनाव को लेकर आशंकित है और असमंजस में भी । कैलेंडर के अनुसार छात्र संघ चुनाव के लिए अगस्त और सितंबर महीना तय किया गया है।

अगस्त का पूरा माह बीत चुका है। इसके बाद भी उच्च शिक्षा विभाग की ओर से छात्रसंघ को लेकर कोई हलचल नहीं है।विभाग के अधिकारियों के मुताबिक आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। यहां यह बताना जरूरी है किं विधानसभा चुनाव के कारण अक्टूबर के पहले सप्ताह में आचार संहिता लग सकती है। इससे पहले छात्रसंघ चुनाव नहीं होते हैं तो इस साल छात्रसंघ चुनाव नहीं हो सकेंगे।

उधर, विभाग की ओर से इस संबंध में विश्वविद्यालयों को भी किसी तरह की तैयारी करने के निर्देश नहीं दिए हैं। विभागीय कमिश्नर अजीत कुमार का कहना है कि इस मामले में अभी निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि यह छात्रसंघ चुनाव विधानसभा चुनाव पर भी असर डाल सकते हैं।

इसलिए सरकार भी चुनाव कराने में इस बार अधिक रुचि नहीं लेगी। क्योंकि, भले ही छात्रसंघ दलीय प्रणाली पर नहीं होते लेकिन संगठन अपनी दावेदारी करते हैं और संगठन से जुड़कार्यकर्ताओं को चुनाव में उतारते हैं।

दूसरी ओर इससे कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के कार्यकर्ताओं को अधिक सक्रिय होने का मौका मिल सकता है। इसलिए इस बार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद भी सत्र शुरू होने के दो महीने बाद भी छात्रसंघ चुनाव के लिए आगे आती नहीं दिख रही है।

वहीं एनएसयूआई के कार्यकर्ता भी शांत बैठे हैं। हालांकि इन संगठनों से जुड़े कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर के कार्यकर्ताओं की पूरी इच्छा है कि इस बार भी चुनाव होने चाहिए।
..पिछली बार भी दो शिफ्टों में कराने पड़े थे चुनाव
करीब छह साल बाद छात्रसंघ चुनाव पिछले साल 31 अक्टूबर को हुए थे। सुरक्षा व्यवस्था के कारण यह चुनाव समय पर नहीं हो सके थे। वहीं सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों के लिए दो शिफ्टों में कराने पड़े थे। सुरक्षा का मुद्दा इस बार भी आड़े आ सकता है। क्योंकि, इस बार पुलिस प्रशासन विधानसभा चुनाव के कारण कॉलेज व विश्वविद्यालय कैंपसों में सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने से हाथ खींच सकता है।

एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष विजय रजक सरकार को डर है कि इस बार के चुनाव में एबीवीपी के कार्यकर्ताओं को हार का सामना नहीं करना पड़े। इसलिए इस बार चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं। पिछले साल भी अचानक चुनाव कराने की घोषणा की गई थी। लेकिन, इस बार एनएसयूआई के कार्यकर्ता पूरी तरह से सक्रिय हैं। जबकि अखिल भारतीय विद्याार्थी परिषद के एक पदाधिकारी ने कहा कहा कि एबीवीपी की मांग के कारण ही पिछले साल चुनाव किए गए थे। इस बार भी चुनाव कराने पढ़ेंगे। यदि चुनाव नहीं होते हैं तो एबीवीपी अपने तरीके से इस मांग को मनवाएगी