Advertisements

डेंगू, चिकन गुनिया,वायरल का कहर, अब तक 4 की मौत, सीएचएमओ कह रहे हालात काबू में

जबलपुर। नगर की मलिन बस्तियों और अनेक कालौनियों में इन दिनों डेंगू, चिकन गुनिया , वायरल और मलेरिया का कहर है। हर घर लोग दर्द से करा रहे हैं। बुखार में तप रहे हैं।इलाज कराने के बाद भी राहत नही मिल पा रही है। कैम्पों का अता-पता नहीं है।अब तो मौतों का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है पर सीएचएमओ का कहना है कि हालात काबू में हैं।
कल चेरीताल में एक व्यक्ति की मौत चिकनगुनिया के कारण हो गई है। यहां कांजी हाउस के समीप रहने वाले 60 वर्षीय कन्छेदी लाल जैन को चिकिन गुनिया ने जकड़ लिया था । उन्हें एक निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया जहां उनकी हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें नागपुर ले गए जहां उनका निधन हो गया। जबकि दो दिन पूर्व ही चांदनी चौक हनुमानताल में एक बुजुर्ग तथा ठक्कर ग्राम में एक किशोर की मौत के बाद रविवार को एक और महिला ने दम तोड़ दिया। इस सबके बावजूद प्रशासन पूरी तरह से बेखबर बना हुआ है। बताया जाता है कि श्याम सिंह के धड़ा के पास रहने वाले स्टार प्रेस परिवार की बहू 42 वर्र्षीय नसीमा बेगम कुरैशी को करीब 10 दिन पहले बुखार आया और उसे हाथ-पैर में भी बुरी तरह की तकलीफ हुई। जिसके चलते वे उठ कर खड़े होने की स्थिति तक में नहीं रहीं। महिला को पहले क्षेत्रीय दवाखानों में ले जाया गया, लेकिन वहां कोई आराम नहीं मिला। बताया जाता है कि नसीमा बेगम को मन्नू लाल अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां भी जब कोई आराम नहीं लगा तो जबलपुर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में दाखिल कराया गया। इसके बाद उपचार प्रदान कर रहे डॉ. दीपक एस. बहरानी की सलाह पर उन्हें नागपुर रेफर कर दिया गया। बताया जाता है कि नागपुर के वोकहॉर्ट हॉस्पिटल में नसीमा को 4 दिन इलाज प्रदान किया गया । नसीमा ने रविवार को सुबह अस्पताल में ही अंतिम सांस ली। मृतका के शव को उनके परिजन शाम को जबलपुर लेकर लौट आए हैं।

कथित लंगड़ा बुखार
मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र गोहलपुर, अधारताल, आनंद नगर, पसियाना, नालबंद मोहल्ला, अमखेरा, नूरी नगर, ठक्कर ग्राम, मंडी मदार टेकरी, हनुमानताल, मोतीनाला आदि जगहों के हजारों परिवार कथित लंगड़ा बुखार से अब तक पीड़ित हो चुके हैं। कुछेक को राहत मिल चुकी है, जबकि इससे बड़ी संख्या में अभी भी लोग बीमार पड़े हैं। शहर के सरकारी व निजी अस्पतालों से दो दो दर्जन मरीजों की रिपोर्ट एनआईआरटीएच भेजी गई थी। इनमें से 5 मरीजों की रिपोर्ट पाजीटिव आई है। इसके अलावा अस्पतालों में वायरल, डेंगू, चिकनगुनिया से पीड़ितों के कारण बेड फुल हैं। इससे मरीजों को फ्लोर बेड दिए जा रहे हैं।

फागिंग मशीन का अता पता नहीं
शहर में डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। यह बीमारी एडीज मच्छर के काटने से होती है। डेंगू का मच्छर दिन में ही काटता है। कई क्षेत्रों में अभी मच्छरों की भरमार है। एंटी लार्वा एक्टिविटी के साथ-साथ नगर निगम द्वारा फॉगिंग मशीन चलाना जरूरी है। पर यह जरूरी नहीं समझा जा रहा है। पीड़ितों का कहना है कि यहां मलेरिया विभाग का कोई कर्मचारी नहीं आया। नालों में गंदगी के कारण मच्छर हो रहे हैं। लार्वा का विनष्टीकरण केवल कागजों में चल रहा है।

वायरल से भी परेशान मरीज
वायरल से पीड़ितों को तेज बुखार के साथ ही शरीर में दर्द भी हो रहा है। इससे मरीज इसे डेंगू समझ रहे हैं। जबकि रक्त परीक्षण के बाद रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। वायरल से पीड़ितों को ओपीडी में ही दवाएं लिखकर दी जा रही हैं। जा़ेडों में दर्द की शिकायत लेकर मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। मरीजों का कहना है कि जो?ों में इतना अधिक दर्द है कि वह उठ नहीं सकते। रक्त परीक्षण में चिकनगुनिया पॉजीटिव आ रहा है।

 

पर हकीकत इसके उलट
वायरल, डेंगू, चिकनगुनिया से पीड़ितों को स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही हैं। जिला अस्पतालों में पर्याप्त दवाएं हैं। पर हकीकत इसके उलट है। घनी आबादी वाले इलाके घमापुर, चेरीताल, मिलौनी$गंज, कोतवाली, मुस्लिम बाहुल क्षेत्रों के अलावा अधारताल, गढ़ा,रांझी सदर में भी हर घर में बीमार लोगों का ग्राफ बढ़ रहा है। यशभारत ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में पिछले दिनों लगड़ा बुखार के कहर की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी । उसके बाद जब दूसरे दिन पीड़ित क्षेत्रों में जाकर हालात जाने और स्वास्थ्य विभाग के दावों की हकीकत जानी तो पता चला कि यहां तो शिविर ही नहीं लगे। स्थिति अनियंत्रित है। दावों की कलई खुल गई। फिर भी सीएचएमओ कह रहे हैं कि स्थिति नियंत्रण में है जो गले नहीं उतर रही।
वरिष्ठ मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. त्रिदीप सइकिया का कहना है कि डेंगू व चिकनगुनिया से बचाव के लिए घरों में सफाई रखना जरूरी है। खासतौर से घरों में पानी का भराव न होने दें। डेंगू या चिकनगुनिया होने पर मरीज की जांच तुरंत डॉक्टर से कराएं।
सर्दी-जुकाम-बुखार मुख्य लक्षण
डॉ. दीपक वरकड़े के मुताबिक, वायरल के मुख्य लक्षणों में सर्दी, जुकाम और बुखार प्रमुख हैं। इसके अलावा गले में संक्रमण और दर्द के लिए भी यह जिम्मेदार हो सकता है। उन्होंने बताया कि इस मौसम में दूषित जल और खुले में बिकने वाले खाने से भी गैस्टोइंटाइटीस, टाइफाइड, पीलिया और हेपेटाइटिस का खतरा बढ़ जाता है।
छूने से भी फैलता है
डॉक्टरों के मुताबिक, इस मौसम में हाथ साफ करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ये बीमारियां छूने से भी फैल सकती हैं। इसलिए जहां तक हो सके इस मौसम में हाथ मिलाने से भी बचना चाहिए। घर में अगर किसी को वायरल बुखार हो तो विशेष सावधानी बरतें।
सात दिन तक रहता है
– टेस्ट रिपोर्ट में जानकारी नहीं मिलती की यह कौन सा बुखार है
– मरीजों को झेलनी पड़ रही है कमजोरी
– चार से सात दिनों तक परेशान कर रहा है वायरल बुखार
– एक को होने पर घर के अधिकांश सदस्य आ जाते हैं चपेट में
इन बातों का ख्याल रखें
– बारिश के मौसम में साफ पानी का इस्तेमाल करना चाहिए। हो सके तो पानी को उबाल कर और छान कर पीना चाहिए।
– बाहर खुले में बिकने वाले खाने से भी परहेज करना चाहिए।
– इस मौसम में सब्जियां भी प्रदूषित हो जाती हैं। इन्हें अच्छी तरह धुलकर और उबालकर खाना चाहिए।