रचना निवासी सिमरिया को सुबह 8.30 बजे दर्द शुरू हुए। 108 एम्बुलेंस को कॉल किया गया, पिछोर प्वॉइंट की एम्बुलेंस पहले से खराब है। ऐसे में हस्तिनापुर की 108 एम्बुलेंस (एमपी 02 एवी 5649) प्रसूता को लेने पहुंची। प्रसूता को डबरा जाना था, लेकिन पिछोर से बाहर निकलते ही एम्बुलेंस का क्लच वायर टूट गया। परिजन धक्का लगाकर जैसे-तैसे एम्बुलेंस को पिछोर पीएससी तक ले गए, जहां पर शाम 5 बजे तक एम्बुलेंस खड़ी रही है।

महिला की पहली डिलेवरी सीजर हुई थी, इसलिए पिछोर पीएससी से महिला को डबरा ले जाने की सलाह दी गई। परिजन ऑटो से महिला को डबरा अस्पताल लेकर पहुंचे, यहां पर स्टाफ ने कहा कि रविवार की छुट्टी है, इसलिए प्रसूता को कमलाराजा अस्पताल ले जाएं। स्टाफ ने प्रसूता के लिए सरकारी एम्बुलेंस की व्यवस्था तक करना जरूरी नहीं समझा। इसके बाद परिजन निजी एम्बुलेंस से महिला को लेकर ग्वालियर के कमलाराजा अस्पताल में पहुंचे हैं। प्रसूता फिलहाल लेबर वार्ड में है।

खस्ताहाल एम्बुलेंस बन गई परेशानी

108 एम्बुलेंसों की खस्ता हालत मरीजों के लिए परेशानी बनती जा रही है। पहले भी इस प्रकार के कई मामले सामने आ चुके हैं, इसके बाद भी एम्बुलेंस की व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ है। जिगित्सा हेल्थ केयर लिमिटेड को नोडल ऑफिसर भी कई पत्र लिख चुके हैं, लेकिन वाहनों के मेन्टेनेंस में गंभीरता नहीं बरती जा रही।

बिना जांच कर देते हैं रेफर

सरकारी अस्पतालों में रेफर करने की पद्धति बढ़ती जा रही है। इसके कारण जयारोग्य अस्पताल पर भी लोड बढ़ता जा रहा है। पिछले दिनों संभागायुक्त ने भी इस पर नाराजगी जाहिर की थी, इसके बाद भी यह सिलसिला थम नहीं रहा है। सूत्रों की मानें तो पहली डिलेवरी होने पर दूसरी डिलेवरी भी ऑपरेशन से होने की अधिक अशंका रहती है। ऐसे में परेशानी से बचने के लिए सरकारी अस्पताल का स्टाफ प्रसूता को रेफर कर देता है। इतना ही नहीं कई बार तो रेफर करने की बजाय सीधे ही बोल दिया जाता है कि प्रसूता को बड़े अस्पताल ले जाओ। इससे रिकॉर्ड में रेफर संख्या भी नहीं बढ़ती और अफसरों को सच्चाई पता भी नहीं चल पाती है।

प्रसूता की स्थिति यदि नॉर्मल थी तो उसे क्यों रेफर किया गया और यदि ऐसी स्थिति थी तो सरकारी एम्बुलेंस की व्यवस्था क्यों नहीं की गई है। डबरा सीबीएमओ से इस मामले में जवाब तलब किया जाएगा। इस प्रकार की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

डॉ. मृदुल सक्सेना, सीएमएचओ

यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है, यदि ऐसा है तो ड्यूटी डॉक्टर एवं नर्सों से जानकारी ली जाएगी। मामले की जांच कराई जाएगी और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो सख्त एक्शन भी लिया जाएगा।