Advertisements

नटखट कान्हा की आगवानी के लिए सज रहा शहर, कल मनाई जाएगी जन्माष्टमी

कटनी। नटखट बंशी वाले गोकुल के राजा, मेरी अंखियां तरस गई अब तो आ जा। कुछ इसी भावनाओं के साथ श्रद्धालु भगवान कृष्ण का जन्म मनाने के लिए व्याकुल से प्रतीत हैं। शहर के कृष्ण मंदिरों में झांकियां सज रहीं हैं। कहीं जीवित झांकी का प्रदर्शन होने की तैयारी है तो कहीं लाख की झांकियों के लिए कलाकार जी जान से जुटे हैं। सत्यनारायण मंदिर में इस वर्ष सौवां जन्माष्टमी उत्सव मनाने की विशेष तैयारियां की जा रही हैं।

इधर शहर के सबसे प्राचीन गोविन्द देव जी मंदिर में इस बार भी सुंदर रांगोली सजाई जा रही हैं। श्री राम जानकी हनुमान मंदिर रोशन नगर कटनी में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव धूम धाम से मनाया जायेगा। यहां सुबह 10 बजे से  भगवान का अभिषेक और श्रंगार किया जावेगा। शाम को भगवान कृष्ण की विभिन्न लीलाओं की झांकियो का आयोजन व भजन रामायण राधे कृष्ण संस्था के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा एवं 04 सितम्बर को सायं 4 बजे से झांकियों की शोभायात्रा निकलेगी जिसका विसर्जन बाबा घाट में होगा।

मुरलीधर मंदिर कैमोर में विविध आयोजन 

कैमोर के अति प्राचीन मुरलीधर मंदिर में जन्माष्टमी पर्व पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे। संध्या के समय मंदिर परिसर में महिलाओं द्वारा फैंसी ड्रेस स्पर्धा का आयोजन होगा जिसमें छोटे छोटे बच्चे बालकृष्ण की सजीव झांकी प्रस्तुत करेंगे। शुभ मुहूर्त में मध्य रात्रि को श्री कृष्ण के जन्म की लीला होगी। समारोह में एसीसी के डायरेक्टर प्लांट सहित ट्रस्ट कमेटी के पदाधिकारी गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति रहेगी।

महालक्ष्मी मंदिर में आकर्षक झांकी सजेंगी।

इसी तरह शहर के एक अन्य प्राचीन मंदिर में महालक्ष्मी मंदिर कमानिया गेट के समीप भी जन्माष्टमी उत्सव के लिए विशेष झांकियां सजाई जा रही हैं। यहां भी प्रतिवर्ष की तरत रात्रि में श्री कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव मनाया जाएगा। शहर के प्राचीन मंदिर लक्ष्मीनाराण मंदिर शेर चौक के समीप भी जन्माष्टमी उत्सव मनाने की जोरदार तैयारियां चल रही हैं।

 रामलला दरबार बरही मे रहेगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम

बरही में भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व के अवसर पर बरही नगर के श्रीरामलला दरबार मे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम रहेगी। इस संबंध में ट्रस्ट अध्यक्ष उत्तम शर्मा ने बताया कि इस पुनीत अवसर पर शाम को मंदिर प्रांगण में विशाल इनामी दंगल कुश्ती का आयोजन किया गया, वही रात 7 बजे से भजन संध्या का कार्यक्रम परंपरानुसार रखा गया गया। रात 12 बजते ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पूरे भक्तिभाव व धूमधाम से मनाया जाएगा। इसी तरह विजयनाथधाम स्थित श्रीराधा कृष्ण बिहारी जू मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम रहेगी। मंदिर समिति राजेन्द्र सोनी ने सभी धर्मप्रिय जनमानस मंदिर पहुँचकर धर्मलाभ प्राप्त करते हुए प्रसाद ग्रहण करने का अपील की गई है।

बांधा मंदिर में जन्माष्टमी महोत्सव

श्री राधा कृष्ण मंदिर ग्राम बांधा में श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव 03 सितम्बर सोमवार को आयोजित है। बताया गया है कि दोपहर 1 बजे से बाल व्यास सत्या किशोरी जू के भजन, रात्रि 8 बजे से जय मां आसमानी रामचरित मानस मंडल द्वारा भजन संकीर्तन की रसगंगा प्रवाहित होगी। भगवान का जन्म ठीक मध्यान्ह रात्रि 12 बजे होगा तथा जन्मोपरांत महाआरती आयोजित होगी।

दो दिन जन्माष्टमी पर जानें कुछ खास बातें

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस बार जन्माष्टमी 2 और 3 सितंबर को है। कई बार कृष्ण जन्माष्टमी दो अलग अलग दिनों पर हो जाती है जब जब ऐसा होता है, तब पहले दिन वाली जन्माष्टमी स्मार्त सम्प्रदाय के लोगों के लिए और दूसरे दिन वाली जन्माष्टमी वैष्णव सम्प्रदाय के लोगों के लिए होती है। जो कि इस साल भी 2 दिन पड़ रही है। जिसमें पहला दिन अर्थात आज 2 सितम्बर को स्मार्त की होगी और 3 सितम्बर को वैष्णव संप्रदाय कीमनाई जाएगी। गृहस्थ जीवन वाले वैष्णव संप्रदाय से जन्माष्टमी का पर्व मनाते हैं और साधु संत स्मार्त संप्रदाय के द्वारा मनाते हैं। स्मार्त अनुयायियों के लिए, हिंदू ग्रन्थ धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु में जन्माष्टमी के दिन को निर्धारित करने के लिए स्पष्ट नियम हैं। जो वैष्णव सम्प्रदाय के अनुयाई नहीं हैं उनको जन्माष्टमी के दिन का निर्णय हिंदू ग्रंथ में बताए गए नियमों के आधार पर करना चाहिए। धर्मग्रंथो के अनुसार भगवान श्री कृष्णा का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र में अर्धरात्रि को और बुधवार को हुआ था इसलिए हर साल इसी तिथि पर और इसी नक्षत्र में कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। पर हर बार ऐसा नहीं होता है कई बार हमको अष्टमी तिथि रात को नही मिल पाती और कई बार रोहिणी नक्षत्र नही हो पाता है। इस साल भी 2 सितंबर को रविवार 8.48 रात तक सप्तमी तिथि है और उसको बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी और रविवार की रात को ही चंद्रमा भी रोहिणी नक्षत्र में उच्च राशि वृषभ मे ही है। इस बार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी रात्रि 8.48 बजे से शुरू होकर अगले दिन 3 सितंबर को रात्रि 07.20 बजे समाप्त हो जाएगी। 3 सितंबर को रात को 7.20 से नवमी तिथि है और मृगशिरा नक्षत्र है। आज 2 सितंबर को स्मार्त कृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे और 3 सितंबर को वैष्णवों के लिए कृष्ण जन्मोत्सव का त्योहार मनाया जाएगा। 2 सितम्बर को निशीथ काल में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र मिल रहा है जो कि स्मार्त संप्रदाय वालों के लिए है। 3 सितम्बर को अष्टमी तिथि एवं रोहिणी नक्षत्र उदया तिथि में मिल रही है। अतः वैष्णव संप्रदाय वालों को इस दिन मनानी चाहिए और इसी दिन व्रत करना चाहिए।

जन्माष्टमी पूजन मुहूर्त 

जन्माष्टमी निशीथ काल पूजन का समय 2 सितंबर मध्यरात्रि 11.57 से 12.48 तक शुभ मुहूर्त है और 3 सितंबर 2018 को रात्रि 8.04 बजे तक निशीथ काल पूजन हैं। स्मार्त लोग 2 सितंबर रविवार को कृष्ण जन्माष्टमी व्रत करेंगे। जन्माष्टमी के दिनए श्री कृष्ण पूजा निशीथ समय पर की जाती है। वैदिक समय गणना के अनुसार निशीथ मध्यरात्रि का समय होता है। निशीथ समय पर भक्त लोग श्री बालकृष्ण की पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं। जन्माष्टमी के दिन का अंतिम निर्धारण निशिता काल के समय, अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के शुभ संयोजन के आधार पर किया जाता है। स्मार्त नियमों के अनुसार हिंदू कैलेंडर में जन्माष्टमी का दिन हमेशा सप्तमी अथवा अष्टमी तिथि के दिन पड़ता है।