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हम किसी से कम नहींः ट्रेन में बकरियोंं का कब्जा, कहीं ऐसा तो नहीं …

जबलपुर। ट्रेनों में जहां रक्षाबंधन को लेकर रेलमपेल मची हुई है आरक्षित एवं जनरल कोच सहित एसएलआर तक में पैर रखने की जगह नहीं है ं जिसकी जहां मर्जी हो वहां पर घुस कर यह यात्रा करने पर मजबूर है।

चिरमिरी रीवा ट्रेन का मामलाः रेल यात्रियों की सुरक्षा भी दांव पर

भीड़ का एक ऐसा ही नजारा चिरमिरी से चल कर रीवा जाने वाली गाड़ी संख्या 51754 के एसएलआर में यात्रियों को देखने मिला कि इसमें सामान की जगह बकरियां अपना सफर पूरा कर रही है। ऐसा ही नही बकरियां जब डिब्बे में चढ़ रहीं थी तो संबंधित रेल कर्मी तमाशबीन बने हुये थे।

यह बकरियां ट्रेन जब महेंन्द्रगढ़ स्टेशन में खड़ी हुई थी इसी दौरान एसएलआर में घु़स रही थी किन्तु मौजूद रेल कर्मियों ने इन्हें बाहर निकालने की जेहमत नहीं उठाई दूर तमाशा देखते रहे। वहीं एक रेल कर्मी ने तो यहां तक बताया कि इसके पूर्व इस स्टेशन से रवाना होकर अपने गंतव्य की ओर जाने वाली ट्रेन मे कुछ बकरियां इसी तरह से कोच का गेट खुला होने के कारण वह उसमें चढ़ कर आगें चली गई है बकरियों में का इस तरह से खुले गेट से चढ़ना और उन्हें देखने के बाद भी बाहर ना निकाला जाना अनेक संदेहों को जन्म दे रहा है जिसमें कहीं ऐसा तो नहीं कि बकरियों को बेच कर फिर योजना बद्ध तरीके से इनको आगे भेजा जा रहा हो।
क्यों खुला रहता है गेट
इस संबंध में रेलवे सूत्रों की मानें तो गेट को लॉक रहना चाहिये और जरूरत के समय इसके लिये गार्ड की मदद से खोला जाना चाहिये जिससे के इसमें लगेज आदि लोड हो सके। किन्तु इस ट्रेन में एक अलग ही देखा गया जिसमें लगेज की जगह बकरियों ने अपना कब्जा कर लिया। वहीं इस संबंध मे सूत्र बताते है कि इस लाईन मे चलने वाली गाड़ियों में रेल यात्रियों की सुरक्षा के लिये कोई रेल पुलिस तैनात हमेशा की तरह की तरह नादारत रहती है ऐसी स्थितियों में बकरियंा तो क्या शरारती तत्व भी घुस जायें तो किसी को कोई मतलब नहीं हैं।