यशभारत विशेष:अजीब तरह के रोग की गिरफ्त में शहर, पीड़ितों ने दिया नाम “लंगड़ा बुखार” जानिए क्‍या कहते हैं चिकित्‍सक

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कटनी, यभाप्र। कोई दर्द से कराह रहा है तो कोई बुखार में तप रहा है। कोई चक्कर खाकर गिर रहा है तो किसी के जोड़ों में असहनीय दर्द के कारण उससे खड़ा भी नहीं होया जा रहा है।

बदन में चित्त- दाने मुंह में छाले, सिर मानो फटा जा रहा है। ये उन क्षेत्रों की भयावह स्थिति को बयां कर रही है जहां शहर के कई लोग एक अजीब तरह के रोग की गिरफ्त में हैं । यह रोग शहर के किसी एक जगह नहीं अपितु घनी बस्तियों से लेकर पॉश कालोनियों तक फैल रहा  है। इससे अबोध बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्ग तक पीड़ित हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए कि हर घर कोई न कोई बीमार है। जो लोग बुखार से पीड़ित हैं वे समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर यह बीमारी है क्या?


जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय निजी अस्पतालों क्लीनिकों में इस तरह के बुखार सी ग्रसित बच्चों, महिलाओं बुजुर्गों की लाइनं इलाज के लिए लगी है। ओपीडी हाउसफुल चल रही है। पर इस बीमारी (बुखार) का कोई नाम सामने नहीं आया है। विशेषज्ञ चिकित्सक भी परेशान हैं। वे डेंगू, चिकनगुनिया भी सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं। इस बुखार के लक्षण चिकनगुनियाजैसे तो है पर ये चिकनगुनिया भी नहीं है। शहर में  हर कहीं चाहे वह दफ्तर हो, अस्पताल हों या फिर बाजार लोग कह रहे हैं कि लंगड़ा बुखार परेशान किए हुए हैं।

सरकारी हो या निजी चिकित्सालय यहां की ओपीडी हर रोज हाउसफुल चल रही है। ज्यादातर मरीज वायरल या कथित चिकनगुनिया से पीड़ित है। लक्षण भी चिकनगुनिया डेंगू से मिलते जुलते हैं पर खून की जांच में ये दोनों बीमारियां नहीं होती। खास तौर से इस बुखार में प्लेटलेट्स कम नहीं हो रही। लेकिन शरीर में कमजोरी आ रही है।

बुखार से शरीर खासतौर से जोड़ों व सिर में बेहद दर्द रहता है लाल चित्ते, दाने, चमड़ी उधड़ने जैसे लक्षण मिल रहे हैं। डॉक्टर मरीजों को पैरासिटामोल के साथ एंटीबायोटिक की बड़ी डोज दे रहे हैं। एक दो दिन तो ठीक रहता उसके बाद फिर असहनीय ताप वेदना घेर लेती है।
यशभारत ने कई सघन बस्तियों का दौरा कर जांच पड़ताल की तो हकीकत चौकाने वाली सामने आयी। इन बस्तियों में शायद ही कोई ऐसा घर हो जहां कोई बीमार बचा हो।

यहीं कटनी की आधारकाप ६० वर्षीय लक्ष्मीबाई चौधरी ने बताया कि भैया क्या बताएं लंगड़ा बुखार ने तो हमें तोड़ दिया है। बड़ी मुश्किल से हालत सुधरी तो नातीबीमार पड़ गया। उसकी वेदना ने तो हमें खून के आंसू रुला दिया। हम ही नहीं पूरे क्षेत्र में इस बीमारी का कहर टूट पड़ा है।

सरकारी अस्पताल में दवा नहीं तो प्राइवेट में इलाज करवाना पड़ा।-47  वर्षीय इंदिरा बाई एक पखवाड़े से खटिया में पड़ी थी। कोई सुध लेने नहीं आया। हम तो बोझा ढो कर अपने परिवार का पेट पालते हैं पर बीमारी के कारण फांके की नौबत आ गई है। इलाज में जमा पूंजी खत्म हो गई। पर बस में बीमारी में भी काम पर जाना पड़ रहा है। कमोवेश यही स्थिति रानी बाई की भी है। उसका कहना है प्रशासन या नगर निगम की ओर से कोई सहायता या उपचार की व्यवस्था नहीं मिल रही है। जयप्रकाया वार्ड निवासी श्री चेलानी से तो चलते ही नहीं बन पा रहा। उनका कहना है कि न जाने यह कैसा रोग है। खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा है। कुमार बताते हैं कि उनके घर में ५ लोग बीमार है। एक दो दिन ठीक होने के बाद फिर बुखार आ जाता है। महेश बताते हैं कि हमें तो कुछ नहीं सूझ रहा। जैसे तैसे ठीक हो गए पर हमारी दो अबोध बच्ची बीमार है। एक के मुंह में दाने आ गए हैं तो दूसरी बुखार और दर्द से चीख रही है। दवा का कोई असर नहीं हो रहा है। समझ में नहीं आ रहा कि करें तो करें क्या।
डाक्टरों की फीस है महंगी
स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके के बाहर के डाक्टरों की फीस काफी महंगी है जिसके कारण उन्हें अफोर्ड करना काफी मुश्किल है. इधर स्थानीय डाक्टरों के पास इतने मरीजों के लिए टाइम ही नहीं है. डाक्टर मरीजों को तीन दिनों बाद का नम्बर दे रहे हैं लेकिन तीन दिनों तक दर्द बर्दाश्त करना काफी मुश्किल है.।

सफाई व्यवस्था नदारद

वेंकटवार्ड के लोगों का कहना है कि हमारे क्षेत्र में गंदगी ही गंदगी है पर सफाई व्यवस्था नदारद है। तमाम शिकायतों के बाद भी कोई सुनवाई नहीं है रही। मच्छरों की भरमार है। इसी कारण बीमारी फैल रही है।कुछ ऐसा ही कहना  है जगमोहन दास वार्ड निवासी बललू निषाद का ।

स्‍वास्‍थ विभाग अंजान

इतने भारी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने की जानकारी के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सकते में है. हांलाकि कटनी के पहले से ही बिमार जिला स्वास्थ्य विभाग को या तो अब तक इस बिमारी के बारे में जानकारी ही नहीं लगी है या फिर जानबूझकर वह इसे नजरअंदाज कर रहा है स्‍वास्‍थ विभाग की ओर से अब तक इलाज को लेकर कोई भी एडवाजरी जारी नहीं किया जाना इसी बात का संकेत है।

चिकित्‍सक की राय वायरल फीवर है यह 
यह लगड़ा बुखार नहीं है बल्कि एक नए तरह का वायरल है। इस मौसम में डेंगू, चिकनगुनिया के साथ वायरल फीवर होता है । इस वायरल के बारे में अभी कोई भी सही सही जानकारी नही है, शहर के उन क्षेत्रों में इस कथित वायरल के मरीज सामने आ रहे है जहां गंदगी ज्‍यादा है। इस वाइरस से लडने के लिए फिलहाल वही मेडिसन उपलब्‍ध है जो अमूमन वायरल में उपयोग की जाती हैं।  इसका दूरगामी परिणाम क्‍या होगा इस बारे में फिलहाल जानकरी नही हैं। 

डॉ  नवीन कर्ण

एम डी नवजीवन हॉस्पिटल कटनी 

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