नई दिल्ली। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि एक चाय वाला अपनी दुकान के बगल में बहने वाले नाले से निकलने वाली गैस से चाय बनता है। इसे लेकर विपक्ष ने तरह-तरह के सवाल उठाए और केंद्र सरकार को घेरने के लिए मोदी के बयान पर ट्रोल करना शुरू किया।

मगर, जल्द ही यह बात लोगों के सामने आ गई कि किस तरह गंदगी से निकलने वाली मीथेन गैस का इस्तेमाल लोग अपने फायदे के लिए कर सकते हैं। ऐसी ही एक और जानकारी है, जिसके बारे में आपने शायद नहीं सुना होगा।

वह यह है कि टॉयलेट के पानी से ऐसी बसें चलाई जा रही हैं। इतना ही नहीं सरकारी एजेंसी ने टॉयलेट के पानी को 78 करोड़ रुपए में बेच भी दिया है। मगर, यह पूरी तरह से सच है और यह प्रयोग नागपुर में हो रहा है।

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नागपुर में बेचे गए टॉयलेट के पानी से बायो सीएनजी बनाई जा रही है। यह इतनी मात्रा में बन रही है कि अब उससे शहर में 50 एसी बसें चलाई जा रही है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि नागपुर में वैकल्पिक फ्यूल को लेकर कई प्रयोग किए जा रहे हैं।

गंगा की सफाई और मीथेन से कमाई

नितिन गडकरी ने बताया कि पेट्रोलियम मंत्रालय के अधीन काम करने वाली तेल व गैस कंपनियों के साथ एक गंगा की सफाई को लेकर एक करार किया गया है। इसके तहत पानी की गंदगी से निकलने वाली मीथेन गैस से बायो सीएनजी तैयार की जाएगी।

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गंगा किनारे बसे 26 शहरों में इस बायो ईंधन से सिटी बसें चलेंगी। इस काम से 50 लाख युवाओं को रोजगार भी मिलेंगा और गंगा की सफाई भी होगी।

उन्होंने कहा कि कोयले से मीथेन निकालकर मुंबई, पुणे व गुवाहाटी में सिटी बस चलाने की योजना है। इसकी लागत 16 रुपए पड़ेगी और यह 62 रुपए प्रति लीटर के डीजल का काम करेगी।