अधिकारियों ने कछुओं की प्रजाति इंडियन टेंट टर्टल बताई, जो वन्य जाति संरक्षण एक्ट में आते हैं। सीजेएम को 50 कछुए गिनकर बताए। इसके बाद सीजेएम ने वन विभाग के अधिकारियों से राय ली कि इनका सबसे अच्छा प्राकृतिक रहवास कहां होगा, जहां ये जिंदा रह सके। इस पर अधिकारियों ने कलियासोत डैम का नाम बताया। इसके बाद सीजेएम ने सभी को डैम में छोड़ने के आदेश दे दिए। सीसीएफ भोपाल वृत्त डॉ. एसपी तिवारी ने बतायाकि कछुओं को डैम में छुड़वा दिया। कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराई गई।

तीन की मौत हो गई, कई की थी हालत खराब

भोपाल रेलवे स्टेशन पर शनिवार शाम को 53 कछुए लावारिस मिले थे। ऐसा माना जा रहा है कि इनकी तस्करी की जा रही थी। हालांकि जीआरपी व वन विभाग अभी तक यह पता नहीं लगा सका है कि भोपाल तक कछुए कैसे पहुंचे। सभी को एक लाल रंग के बैग में ठूंस-ठूंस कर भरा गया था। इनमें से तीन की मौत हो गई जबकि कई की हालत खराब हो गई। रविवार को कछुओं को वन विहार में रखा गया था। यहीं से इन्हें कोर्ट में पेश किया था। इन कछुओं को वन विहार प्रबंधन के सुपुर्द किया था, लेकिन प्रबंधन ने विधिवत कोर्ट से अनुमति लेने की बात कहते हुए रखने से इनकार कर दिया।

कलियासोत डैम में छोड़ने की तीन वजह

1 – कलियासोत डैम में ज्यादातर पानी जंगल से होकर आता है जो बड़े तालाब की तुलना में ज्यादा साफ है।

2 – कलियासोत डैम ज्यादा गहरा नहीं है।

3 – डैम के किनारों पर कंकड़ युक्त रेतली मिट्टी है, जो उनके लिए मुफीद है।

वन्यप्राणी संरक्षण एक्ट की अनुसूची-1 में शामिल हैं कछुए

लावारिस मिले कछुए इंडियन टेंट टर्टल प्रजाति के हैं। यह प्रजाति वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 के भाग दो में शामिल की गई हैं। यानी संरक्षण की दृष्टि से इस प्रजाति के कछुओं का संरक्षण बहुत खास है।

7 साल की सजा का प्रावधान

इंडियन टेंट टर्टल प्रजाति के इन कछुओं की तस्करी में लिप्त आरोपितों को 7 साल की सजा का प्रावधान है। स्थिति को देखते हुए कोर्ट जुर्माना भी लगा सकता है।

पारिस्थितिक तंत्र के लिए जरूरी है कछुए

कछुए पारिस्थितिक तंत्र के लिए जरूरी हैं। ये नदियों में रहकर पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत बनाने में भूमिका अदा करते हैं। वन विभाग को तस्करों तक पहुंचना चाहिए – एके बरोनिया, वन्यप्राणी विशेषज्ञ