सरकारी स्कूलों ने वसूली हजारों विद्यार्थियों से फीस, अब वापसी की तैयारी

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जबलपुर। असंगठित श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई की फीस माफ रहेगी, इसकी घोषणा करीब दो माह पहले हो गई थी, लेकिन स्कूली शिक्षा विभाग के स्पष्ट आदेश आने में देरी के चलते सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों से शिक्षा विभाग ने नामांकन और बोर्ड परीक्षा शुल्क के नाम पर फीस वसूल ली।

अब जिम्मेदार जल्द यह शुल्क विद्यार्थियों को लौटाने की बात कह रहे हैं। गौरतलब है कि सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले असंगठित श्रमिकों के बच्चों की फीस पूरी तरह माफ कर दी है। स्कूल शिक्षा विभाग ने एडमिशन के दौरान इसके लिखित आदेश जारी कर दिए थे। सरकारी स्कूलों ने इस आदेश को नहीं माना और अपने यहां पढ़ने वाले सभी बच्चों से नामांकन और परीक्षा शुल्क ले लिया। विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों ने विभाग के आदेश का हवाला दिया और जिम्मेदारों को बताया तो इस आदेश को सिरे से खारिज कर दिया। शिकायत मिलने पर कई प्रिंसिपलों और हेडमास्टर्स का कहना कहा था कि हमारे पास फीस माफी के आदेश हैं। परीक्षा शुल्क माफी के नहीं। हम फीस नहीं परीक्षा फीस ले रहे हैं। इससे जिले के सरकारी हाई और हायर सेकंडरी स्कूल में पढ़ने वाले 9वीं, 10 एवं 12वीं के विद्यार्थियों से नामांकन और बोर्ड परीक्षा शुल्क के नाम पर करीब एक लाख विद्यार्थियों से फीस वसूल ली गई। इनमें करीब 25 हजार से ज्यादा ऐसे विद्यार्थी भी शामिल हैं, जो असंगठित श्रमिकों के बच्चे हैं।
विद्यार्थियों से वसूली फीस पर नजर
नामांकन शुल्क के नाम पर 9वीं के स्टूडेंट से 275 रुपए लिया। 10वीं एवं 12वीं के बच्चों से 925-925 रुपए परीक्षा शुल्क के रूप में लिया। सरकारी स्कूलों में यह डमी परीक्षा के नाम पर लिया है। इनमें से कई स्कूलों ने तो माध्यमिक शिक्षा मंडल को राशि जमा भी कर दी।
छात्रों को ली गई फीस लौटाई जाएगी
प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि पहले फीस माफी के आदेश आए थे। परीक्षा फीस माफी के नहीं। इससे बच्चों से नामांकन और परीक्षा शुल्क लिया गया। चार दिन पहले ही आदेश आए हैं। जिन असंगठित श्रमिकों के बच्चों से शुल्क ले लिया है, उसे लौटाया जाएगा।

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