2019 में सांसदों की पत्नियों को भी मैदान में उतारने की तैयारी

नई दिल्ली । 2019 की तैयारी में जुटी बीजेपी अब सिर्फ अपने कार्यकर्ताओं को ही नहीं बल्कि अपने सांसदों की पत्नियों को भी बाकायदा सुनियोजित तरीके से चुनाव प्रचार के मैदान में उतारने की तैयारी में है। पार्टी ने सांसदों की पत्नियों को इस तरह के गुर बताए हैं, जिनसे वे न सिर्फ पार्टी का प्रचार कर सकें बल्कि अपने पति की राजनीतिक कार्यों के सहायता भी कर सकें।

इसके लिए बाकायदा दो दिन का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिनमें पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह, लाल कृष्ण आडवाणी और सुषमा स्वराज भी शामिल हुईं। बीजेपी सूत्रों का कहना है कि हालांकि अभी औपचारिक तौर पर कोई फैसला नहीं लिया गया है लेकिन इस कार्यक्रम का एक मकसद यह भी है कि सांसदों की पत्नियों का राजनीतिक कौशल भी परखा जाए ताकि जरूरत पड़ने पर उनका पार्टी पूरी तरह से राजनीति के लिए उपयोग कर सके। दो दिन के इस कार्यक्रम में सिर्फ सांसदों की पत्नियां ही नहीं बल्कि महिला सांसद भी शामिल हुईं।

महिलाओं का दो दिन का यह कार्यक्रम कमल सखी के रूप में हुआ जिसमें महिला सांसदों और पुरुष सांसदों की पत्नियों समेत 100 से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया। हालांकि, इसका मकसद आपसी मेल मिलाप था लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस कार्यक्रम में पार्टी के सीनियर नेताओं ने इन महिलाओं को वो मंत्र दिए, जिससे वे अपने सांसद पतियों की मदद कर सकें।

उन्हें यह भी बताया गया कि वे किस तरह से घर में रहकर भी अपने सांसद पतियों के राजनीतिक कार्यों में मदद कर सकती हैं। इनमें वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर अपने क्षेत्र की महिलाओं से जुड़ना और उ”वला जैसी योजना का फायदा ले चुकी महिलाओं से अन्य महिलाओं को रुबरु कराना ताकि उन्हें पता चल सके कि इस तरह की योजना का किस तरह से फायदा मिला है।

पार्टी नेताओं का कहना है कि आमतौर पर इस तरह के कार्यक्रम में पहले 40 से 50 महिलाएं ही शामिल होती थीं लेकिन इस बार चूंकि अब 2019 की तैयारी हो रही है इसलिए इस कार्यक्रम को अधिक जोशखरोश से आयोजित किया गया था और सांसदों की पत्नियों ने भी इस कार्यक्रम में दिलचस्पी दिखाई। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि इस कार्यक्रम का एक कारण यह भी हो सकता है कि सांसदों की पत्नियों का राजनीतिक कौशल का आकलन किया जाए ताकि अगर जरूरत पड़े तो उनका राजनीतिक कार्य क्षेत्र बढ़ाया जाए।