सागर। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की चौथे सेमेस्टर की हिंदी साहित्य की कापियां सागर में बीए प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों से चेक कराने का मामले में जमकर चलने वाली कमीशनखोरी भी सामने आई है। दरअसल, अतिथि विद्वानों को उत्तर पुस्तिकाएं कमीशन देने के बाद जांचने के लिए मिलती हैं।

वे प्रत्येक कॉपी पर 2 से 7 रुपए तक कमीशन कोऑर्डिनेटर को देते हैं, तब उन्हें कॉपियां चेक करने को दी जाती हैं। कोऑर्डिनेटर को सिर्फ ज्यादा से ज्यादा कमीशन से मतलब होता है, फिर चाहे कॉपियां किसी से भी चेक कराई जाएं।

कुछ अतिथि विद्वानों से यह कमीशन लेने के बाद कॉपियां दी जाती हैं, तो कुछ से बिल भुगतान होने के बाद कमीशन लिया जाता है। इसी कमीशन के लेनदेन से जुड़ा एक ऑडियो इस मामले के बाद वायरल हुआ है। जिसमें अतिथि विद्वान और कोऑर्डिनेटर के बीच कॉपियों के जांचने, बिल लगाने, बीयू के डिप्टी डायरेक्टर यशवंत पटेल और उज्जैन विवि की कॉपियों के हुए भुगतान पर बीस फीसदी तक कमीशन की राशि देने को लेकर बातचीत हो रही है।

इनमें जो कोऑर्डिनेटर की आवाज है, वह कथित तौर पर डॉ. संजीव दुबे की बताई जा रही है। हालांकि डॉ. दुबे इसे फर्जी बताते हुए जांच कराने की बात कर रहे हैं। इस ऑडियो में एक बिचौलिए के तौर पर मनोज का नाम भी सामने आया है, जो अतिथि विद्वानों से कमीशन फिक्स कर कॉपियां जांचने को देता है। नवदुनिया से बातचीत में डॉ. दुबे भी मनोज जैन के घर कॉपियां रखवाने की बात स्वीकार कर रहे हैं।

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सात दिन में जांचते हैं 5 हजार कॉपियां

मोटा कमीशन पाने के चक्कर में एक अतिथि विद्वान को 5 हजार तक कॉपियां दी जाती हैं, जो उन्हें सिर्फ सात दिन में चेक करके वापस करनी होती हैं। एक दिन में 700 कॉपियां कोई चेक नहीं कर सकता इसलिए ठेके पर छात्रों से कॉपियां चेक करा ली जाती हैं।

आसपास के जिलों में भी नेटवर्क

ज्यादा से ज्यादा कॉपियां चेक कराकर मोटा कमीशन कमाने के लिए बहुत बड़ा नेटवर्क तैयार किया गया है। सागर और आसपास के कई अतिथि विद्वान सागर आकर कमीशन पर कॉपियां ले जाते हैं। गढ़ाकोटा, शाहगढ़, दमोह, रहली, केसली, विदिशा, पन्ना, जबेरा, मालथौन सहित आसपास के जिले में अन्य स्थानों पर अतिथि विद्वानों को कॉपियां दी जाती हैं।

एक आंसरशीट जांचने का यह है रेट

महाराजा छत्रसाल विवि छतरपुर, डॉ. हरीसिंह गौर विवि सागर, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन, देवी अहिल्याबाई विवि इंदौर, अवधेश प्रताप सिंह विवि रीवा और जीवाजी विवि ग्वालियर की यूजी की एक आंसरशीट जांचने पर 15 और पीजी की आंसरशीट पर 20 रुपए का भुगतान किया जाता है। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय और भोज विश्वविद्यालय की यूजी की आंसरशीट पर 20 रुपए और पीजी की आंसरशीट पर 25 रुपए भुगतान किया जाता है। यह राशि सीधे कॉपी जांचने वाले को विवि से दी जाती है। कॉपी जांचने वाला इसी राशि में से 2 से 7 रुपए प्रति कॉपी तक कोऑर्डिनेटर को कमीशन देता है। जबकि विवि कोऑर्डिनेटर को प्रत्येक कॉपी पर 3 रुपए अलग से देता है।

(नोट- इस ऑडियो में पहली आवाज कथित तौर पर डॉ. संजीव दुबे की और दूसरी अतिथि विद्वान की बताई जा रही है, लेकिन यशभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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बातचीत का ऑडियो: तुम हिसाब किताब क्यों नहीं कर रहे?

संजीव- अपना पैसा आ गया है उज्जैन का, तुम हिसाब-किताब क्यों नहीं कर रहे?

अतिथि- जी सर हमने उन लोगों को भी फोन लगाया था, लेकिन।

संजीव- अरे तुम उनकी छोड़ो, हम तुम्हारी बात कर रहे। सब से ले लेंगे हम, उनसे डायरेक्ट ले लेंगे।

अतिथि- जी सर।

संजीव – हां, तुम्हारा कितना आ गया है?

अतिथि- सर हमारा 28 हजार 300 आया है।

संजीव- हां तो 28 दूनी कितने हो जाएंगे 56…. 56 सौ दो। कब लेकर आ रहे?

अतिथि- सर हम आज शाम को आएंगे।

संजीव- हां, बस ठीक है। हम बाकी सब से बात कर लेंगे।

अतिथि- सर कॉपियां और आई हैं क्या?

संजीव- भोपाल की इंग्लिश की और पॉलिटिकल साइंस की आई हैं।

अतिथि- जी सर। कोई को बताना तो नहीं है सर?

संजीव- अब हमने तो मनोज को दे दिया है, मनोज ही कर रहे हंै। हमारे घर में तो बहुत जमके काम चल रहा है तो रखने की जगह ही नहीं है। तो उन्हीं के घर ले गए हैं वो तो।

अतिथि- चंदन से बात हुई थी क्या सर?

संजीव- हमाई नहीं हुई अभी, तुम्हीं कर लो जो करना हो। वे सब लोग तुम से दलाल-मलाल कहने लगे।

अतिथि- अच्छा।

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संजीव- वे यहां से इंग्लिश-विंग्लिश की ले गए थे उज्जैन की। वे हमने भोपाल भी सारे बिल फिर से भिजवा दिए हैं।

अतिथि- जी सर।

संजीव- हो जाएगा अब पेमेंट भोपाल का। तुम्हारा तो हो ही गया है।

अतिथि- जी सर एक बिल आया है।

संजीव- अरे तुम तो सीधे भोपाल जा-जा कर.. तुम सब काम करवा आए ना।

अतिथि- नहीं सर। एक बिल आया है 5 हजार 800 का। बाकी बड़े बिल, हमारे 5 बिल हैं, उनमें से कोई नहीं हुआ। हम सर पेपर में लगे थे तो सोच रहे थे कि बाद में बात करेंगे। एक बिल आया है, जैसे ही आएंगे तो हम आपको बता देंगे सर।

संजीव- वो लिस्ट बनाते थे न, वो लिस्ट हमने पटैल साब को भेज दी है। वे सारे बिल खोजवा रहे हैं और नहीं हैं तो वे देखदाख के चढ़वाएंगे, वो सब करवाएंगे पेमेंट।

अतिथि- जी सर।

संजीव- आओ फिर शाम को।

सब झूठी बातें, ऑडियो की जांच कराएं

सब झूठी बातें हैं। सब फर्जी है। सारे आरोप निराधार हैं। ई-पेमेंट है तो सबके खाते में जाता है। हम स्पष्ट रूप से नकारते हैं। ऑडियो की जांच कराएं। लैब में जांच हो। माहौल चल रहा है तो लोग मेरे खिलाफ कुछ भी जोड़ने लगे हैं। मैं कभी कमीशन नहीं लेता। जब मैं घर पर नहीं रहता था, तब दूर-दूर से जो कॉपी आती थीं, उन्हें मनोज जैन के घर रखवा देते थे। – डॉ. संजीव दुबे, कोऑर्डिनेटर