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अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगी हुई LPG, फिर भी सरकार नहीं बढ़ा रही दाम

नेशनल डेस्‍क। अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़ने के बावजूद सरकार ने घरेलू बाजार में सब्सिडाइज्ड एलपीजी सिलेंडर के दाम पुराने ही रखे हैं जिसकी वजह से एलपीजी सब्सिडी में पिछले दो माह के दौरान 60 प्रतिशत उछाल दर्ज किया गया. इंडियन आयल कॉरपोरेशन के चेयरमैंन संजीव सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में वृद्धि के बाद भी सरकार ने ग्राहकों को राहत देते हुये घरेलू बाजार में सब्सिडाइज्ड सिलेंडर के दाम नहीं बढ़ाए .

उन्होंने कहा कि बैंक खातों में ट्रांसफर की जाने वाली सब्सिडी राशि मई में जहां 159.29 रुपये प्रति सिलेंडर थी , जून में यह बढ़कर 204.95 रुपये और जुलाई में 257.74 रुपये पर पहुंच गई.

जून से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी के दाम बढ़ रहे हैं. बिना सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर का दाम मई में 653.50 रुपये प्रति सिलेंडर था. जून में यह बढ़कर 698.50 रुपये प्रति सिलेंडर हो गया है. यानी इसमें 48 रुपये की बढ़ोतरी हुई. इस महीने बिना सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 55.50 रुपये और बढ़कर 754 रुपये हो गई.
उपभोक्ताओं को एक साल में सब्सिडी वाले 12 सिलेंडर मिलते हैं. उसके बाद उन्हें बाजार मूल्य पर सिलेंडर लेना पड़ता है. सिंह ने कहा कि एलपीजी के दाम बढ़े हैं लेकिन सब्सिडी वाले सिलेंडर के दाम नहीं बढ़ाए गए. ‘उपभोक्ताओं पर कर के मामूली हिस्से का ही बोझ डाला गया है.’

नियमों के अनुसार एलपीजी पर जीएसटी का कैलकुलेशन ईंधन के बाजार मूल्य पर की जाती है. कीमतें बढ़ने के साथ कर भी बढ़ा है. इससे सब्सिडी वाला सिलेंडर लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए दरों में मामूली वृद्धि हुई है. मई में सब्सिडीयुक्त सिलेंडर का दाम 491.21 रुपये था.  दूसरी ओर नीति आयोग ने पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मिनिस्ट्री को सुझाव दिया है कि एलपीजी से जुड़ी ‘सब्सिडी’ ईंधन के स्पष्ट रूपों को अपनाने में दिक्कत पैदा कर रही है. मंत्रालय को लिखे नोट में नीति आयोग ने यह बात कही है. नीति आयोग ने कहा है एलपीजी पर सब्सिडी पाने वाले पात्र लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से ‘खाना पकाने की सब्सिडी’ दी जानी चाहिए.