निजी स्कूलों ने कितनी फीस बढ़ाई, कितनी वसूल रहे, देनी होगी डिटेल

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जबलपुर। देर से ही सही पर निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने कलेक्टर ने अब ध्यान केंद्रित किया है। जबलपुर। देर से ही सही पर निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने कलेक्टर ने अब ध्यान केंद्रित किया है। स्कूलों के खिलाफ मिल रहीं शिकायतों को देखते हुए कलेक्टर ने स्कूलों की जांच कराने का निर्णय लिया है। निजी स्कूलों ने कितनी फीस बढ़ाई, कितनी वसूल रहे? एनसीईआरटी की किताबें चला रहे या नहीं? सहित अन्य विषयों की पड़ताल कराई जाएगी।

कलेक्टर की अध्यक्षता में निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) अधिनियम के तहत बनाई गई जिलास्तरीय कमेटी ही स्कूलों के रिकार्ड की जांच करेगी। इसके पहले कलेक्टर एक-दो दिन में शिक्षा विभाग की बैठक बुलाकर निजी स्कूलों की जानकारी लेंगी। फिर स्कूलों से १० दिनों के भीतर फीस, किताब संबंधी जानकारी जमा कराई जाएगी। स्कूलों द्वारा दी गई फीस, किताब की जानकारी का वेरीफिकेशन जिला पंचायत सीईओ से कराया जाएगा।

इन बिन्दुओं की होगी जांच

-फीस

फीस नियंत्रण अधिनियम के तहत स्कूलों को १० प्रतिशत तक फीस बढ़ाने की छूट दी गई है। स्कूलों के रिकॉर्ड की जांच कर ये देखा जाएगा कि किस स्कूल ने कितनी फीस बढ़ाई और वास्तव में कितनी वसूल रहे।

-एनसीईआरटी

शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों में अनिवार्य रूप से एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के निर्देश दिए हैं। जांच में ये भी देखा जाएगा कि कितने स्कूल एनसीईआरटी की किताब चला रहे और कितने नहीं?

-आरटीई

आरटीई के तहत गरीब वर्ग के बच्चों को स्कूलों में दाखिला देने वाले कितने स्कूल फीस प्रतिपूर्ति का दावा कर रहे। कौन से स्कूल हैं जिन्होंने आरटीई के तहत एडमिशन तो दिए, लेकिन अब दावा नहीं कर रहे। ऐसे ५४ स्कूल सामने आए हैं जिन्होंने फीस प्रतिपूर्ति का दावा पेश नहीं किया है।

कार्रवाई भी होगी

स्कूलों की जांच के बाद यदि कहीं गड़बड़ी मिली तो नियमानुसार स्कूलों पर कार्रवाई भी की जाएगी। मान्यता समाप्त करने शासन से पत्राचार भी किया जाएगा।

ऐसी है स्कूलों की मनमानी

  • कुछ स्कूलों ने १० की जगह २० प्रतिशत तक बढ़ा दी फीस।

  • अपै्रल, मई, जून की फीस भी जमा करवा ली। अब जुलाई, अगस्त, सितंबर की एक साथ जमा करवा रहे।

  • फीस न जमा न करने पर रोजाना छात्रों को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।

  • निजी स्कूलों ने पहली से आठवीं तक के कोर्स में एनसीईआरटी की किताबें लगाई ही नहीं।

  • अभिभावकों से निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदवा दी।

जल्द ही शिक्षा विभाग की बैठक कर निजी स्कूलों की जानकारी ली जाएगी। १० दिनों के भीतर स्कूलों से फीस, किताब की सेल्फ डिटेल बुलवा कर वेरीफिकेशन कराया जाएगा। गड़बड़ी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी। -छवि भारद्वाज, कलेक्टर

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