40 हत्याओं का आरोपी मुन्ना बजरंगी बचपन से बनना चाहता था डॉन

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लखनऊ। बागपत जेल में गोली मारकर मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी गई। माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी के पिता पारसनाथ सिंह उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाना चाहते थे, लेकिन प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी बचपन से ही डॉन बनना चाहता था।

उसने पांचवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी और हथियारों के शौक की वजह से 17 साल की उम्र में पहली बार पुलिस के रिकार्ड में उसका नाम शामिल हो गया। जौनपुर के सुरेही थाना में उसके खिलाफ मारपीट और अवैध असलहा रखने का मामला दर्ज किया गया था।

80 के दशक में मुन्ना अपराध की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश में लगा था। इसी दौरान उसे जौनपुर के स्थानीय दबंग माफिया गजराज सिंह का संरक्षण हासिल हो गया। मुन्ना अब उसके लिए काम करने लगा था। इसी दौरान 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी।

के बाद उसने गजराज के इशारे पर ही जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करके पूर्वांचल में अपना दम दिखाया। उसके बाद उसने कई लोगों की जान ली। मुन्ना बजरंगी का दावा है कि उसने अपने 20 साल के आपराधिक जीवन में 40 हत्याएं की हैं।

मुख्तार अंसारी के गैंग में हुआ शामिल

पूर्वांचल में अपनी साख बढ़ाने के लिए मुन्ना बजरंगी 90 के दशक में पूर्वांचल के बाहुबली माफिया और राजनेता मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया। साल 1996 में मुख्तार के सपा के टिकट पर मऊ से विधायक निर्वाचित होने के बाद गैंग की ताकत बहुत बढ़ गई। मुन्ना सीधे तौर पर सरकारी ठेकों को प्रभावित करने लगा।

पूर्वांचल में सरकारी ठेकों और वसूली के कारोबार पर मुख्तार अंसारी का कब्जा था। मगर, इसी दौरान बीजेपी के विधायक कृष्णानंद राय तेजी से उभर रहे थे और मुख्तार के लिए चुनौती बन रहे थे। मुख्तार के दुश्मन ब्रिजेश सिंह का हाथ राय पर था। कृष्णानंद राय की बढ़ती ताकत से मुख्तार विचलित हो रहा था, लिहाजा उसकी हत्या के लिए मुन्ना बजरंगी को मुख्तार ने लगा दिया।

29 नवंबर 2005 को माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के कहने पर मुन्ना बजरंगी ने कृष्णानंद राय पर दिन दहाड़े लखनऊ हाइवे पर एके 47 से 400 राउंग गोलियां चालाई। हमले में गाजीपुर से विधायक कृष्णानंद राय के अलावा उनके साथ चल रहे छह अन्य लोग भी मारे गए थे। पोस्टमार्टम के दौरान हर मृतक के शरीर से 60 से 100 तक गोलियां निकली थीं।

इस हत्या को अंजाम देने के बाद वह मोस्ट वॉन्टेड बन गया था। भाजपा विधायक की हत्या के अलावा कई मामलों में उत्तर प्रदेश पुलिस, एसटीएफ और सीबीआई को मुन्ना बजरंगी की तलाश थी। उस पर सात लाख रुपए का इनाम भी घोषित किया गया।

यूपी पुलिस और एसटीएफ से बचने के लिए मुन्ना बजरंगी भागकर मुंबई चला गया। इस दौरान वह कई बार विदेश भी आता-जाता रहा। उसके अंडरवर्ल्ड के लोगों से रिश्ते भी मजबूत होते जा रहे थे। वह मुंबई से ही फोन पर अपने लोगों को दिशा निर्देश दे रहा था।

मुंबई से नाटकीय ढंग से हुई गिरफ्तारी

29 अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना को मुंबई के मलाड इलाके में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया था। माना जाता है कि मुन्ना को अपने एनकाउंटर का डर सता रहा था। लिहाजा, उसने खुद एक योजना के तहत दिल्ली पुलिस से अपनी गिरफ्तारी कराई थी। जेल में बंद रहकर वह वहीं से अपने गिरोह को चला रहा था।

पूर्व बसपा विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के आरोप में बागपत कोर्ट में मुन्ना बजरंगी की पेशी होनी थी। मुन्ना बजरंगी को रविवार झांसी जेल से बागपत लाया गया था। उसे तन्हाई बैरक में कुख्यात सुनील राठी ओर विक्की सुंहेड़ा के साथ रखा गया था।

शुरुआती जांच हत्या में कुख्यात अपराधी सुनील राठी का नाम सामने आ रहा है। सुनील राठी यूपी के साथ उत्तराखंड में सक्रिय है। इस बीच यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जेलर को निलंबित कर दिया है और न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।

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