z+ सुरक्षा में आएगी भगवान सर्वेश्वर की 5 हजार साल पुरानी दाल के बराबर की मूर्ति

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इंदौर। भगवान सर्वेश्वर की चने की दाल के आकार की मूर्ति शनिवार को शहर पहुंचेगी। 5110 साल पुरानी मूर्ति अपने ऐतिहासिक महत्व और छोटे आकार की वजह से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। सरकार ने इसे जेड प्लस सुरक्षा दे रखी है। शालिग्राम पत्थर की बनी इस मूर्ति में राधा-कृष्ण का युगल स्वरूप नजर आता है। भगवान के इस स्वरूप के दर्शन भक्त मैग्नीफाइंग ग्लास के माध्यम से करते हैं।

मूर्ति निम्बार्काचार्य श्यामशरणदेवाचार्य के साथ राजस्थान के सलेमाबाद से शनिवार शाम 7 बजे आएगी। अखिल भारतीय श्री निम्बार्क संप्रदाय के प्रचार प्रमुख गोविंद राठी ने बताया कि मूर्ति पहली बार इंदौर शहर आ रही है। रविवार सुबह 8 बजे बजरंग नगर में अभिषेक के बाद दर्शन होंगे। श्रीजी महाराज के साथ उनके 20 सेवादार भी होंगे। वैष्णवों के सभी संप्रदायों में निम्बार्क सबसे प्राचीन है। सिंहस्थ में वैष्णव संप्रदायों में प्रथम स्थान इसी का आता है। यहां से महाराजश्री औरंगाबाद (महाराष्ट्र) के मूंगीपाटन क्षेत्र जाएंगे।

600 वर्षों से सलेमाबाद में है मूर्ति

आश्रम में उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार भगवान सर्वेश्वर की यह ऐतिहासिक मूर्ति 600 वर्षों से सलेमाबाद स्थित आश्रम में रखी है। इसके पहले मूर्ति के वृंदावन में होने के दस्तावेज हैं। मूर्ति के बारे में संप्रदाय के प्रमुख संतों ने भी हजारों साल पहले ग्रंथों में उल्लेख किया था।

20 साल पहले मिली थी सुरक्षा

ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए 20 वर्ष पहले तत्कालीन सरकार ने जेड प्लस स्तर की सुरक्षा प्रदान की थी। पूजा आदि में विघ्न होने की वजह से आश्रम ने सुरक्षा घेरा छोटा करने का अनुरोध किया था। इसके बाद से बीस सेवादार और चार सुरक्षाकर्मी काफिले में रहते हैं। शेष सुरक्षा स्थानीय स्तर पर दी जाती है।

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