अमर हैं अमरनाथ गुफा के ये दो कबूतर, यह है पौराणिक कथा

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धर्म डेस्क। अमरनाथ की गुफा में हर साल आषाढ़ पूर्णिमा से अपने आप बर्फ से शिवलिंग बनने लगता है। चमत्कार की बात यह है कि इसके आस-पास जमी बर्फ कच्ची होती है जबकि शिवलिंग ठोस बर्फ का बना होता है। श्रावण पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के दिन इस शिवलिंग का अंतिम दर्शन होता है। इसके बाद साल भर बाद ही शिवलिंग बनता है।

इस गुफा में अक्सर श्रद्धालु दो कबूतरों के देखे जानी की बात करते हैं। कहा जाता है कि इसी पवित्र गुफा में भगवान शिव और माता पार्वती कई युगों से कबूतर के रूप में विराजमान हैं। इस संदर्भ में कथा है, जानते हैं उसके बारे में…।

पुराणों में वर्णित है कि एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा, आप अजर-अमर हैं और मुझे हर जन्म के बाद नए स्वरूप में आकर फिर से वर्षों की कठोर तपस्या के बाद आपको प्राप्त करना होता है। मेरी इतनी कठोर परीक्षा क्यों होती है और आपके कंठ में पड़ी यह नरमुण्ड माला तथा आपके अमर होने का रहस्य क्या है?

भगवान शंकर ने माता पार्वती से एकांत और गुप्त स्थान पर अमर कथा सुनने को कहा, जिससे अमर कथा को कोई अन्य जीव न सुन पाए। जो कोई भी इस अमर कथा को सुन लेता है, वह अमर हो जाता। पुराणों की मानें, तो भगवान शिव ने पार्वती को अमर कथा सुनाने के लिए जिस गुफा में ले गए, वहीं गुफा अमरनाथ गुफा के नाम से प्रसिद्ध हुई। यहां आकर भगवान शंकर ने उन्हें अपनी साधना की अमर कथा सुनाई। इसी आज के समय में अमरत्व के नाम से जाना जानता है।

इसलिए भोलेनाथ ने अपनी सवारी नंदी को पहलगाम में छोड़ दिया। इसके बाद जटाओं से चंद्रमा को चंदनबाड़ी में अलग कर दिया। गंगाजी को पंचतरणी में छोड़ा और गले में सुशोभित सर्पों को शेषनाग में छोड़ दिया। इन सभी चीजों को त्यागने के बाद अगले पड़ाव पर भगवान शिव ने अपने पुत्र गणेश को महागुना के पर्वत के पास छोड़ दिया।

बता दें कि भगवान शिव ने पिस्सू घाटी में पिस्सू नामक कीड़े को भी अपने शरीर से अलग कर दिया था। इस प्रकार भगवान शिव ने जीवन दायिनी पांचों तत्व को अलग-अलग जगह पर अपने शरीर से अलग कर दिया। अपने शरीर से सभी चीजों को अलग कर देने के बाद भगवान शिव गुप्त गुफा में प्रवेश कर गए और उन्होंने माता पार्वती को अमर कथा सुनानी शुरू कर दी।

मगर, अमर कथा सुनाते वक्त माता पार्वती को बीच में ही नींद आ गई। उसी बीच दो सफेद कबूतर शिव जी की इस कथा को उस गुफा में बैठकर सुन रहे थे। परंतु

परंतु शिव जी को यह बात पहले मालूम नहीं चली कि वहां दो कबूतर भी मौजूद हैं।

कथा समाप्त होने के बाद शिवजी की दिव्य दृष्टि कबूतरों के ऊपर पड़ी। कबूतरों को देखने के बाद भगवान शिव काफी ज्यादा क्रोधित हो गए। क्रोध के मारे भगवान शिव उन कबूतरों को मारने के लिए दौड़े। तभी उन कबूतरों ने भगवान शिव के सामने कहा कि हे प्रभु हमने आपसे अमर होने की कहानी सुनी है। ऐसे में अगर आप हमें मार डालते हैं तो आप की यह कथा गलत साबित हो जाएगी।

इसके बाद भगवान शिव ने उन कबूतरों को छोड़ दिया और उन्हें आशीर्वाद दिया कि तुम हमेशा इस स्थान पर शिव-पार्वती के प्रतीक चिन्ह के रूप में निवास करोगे। कबूतरों के इस जोड़े के अमर हो जाने के बाद आज भी इस जोड़े का दर्शन अमरनाथ जाने वाले यात्रियों को हुआ करते हैं। अमरनाथ की गुफा में जिसे भी तुम्हारे दर्शन होंगे उन्हें शिव-पार्वती के दर्शन का पुण्य मिलेगा।

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