Exclusive-विधानसभा चुनाव : कटनी में समीकरणों को नये मतदाताओं ने चखाया है मजा

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कटनी। जिले के विधानसभा चुनावों में समीकरणों की बिसात राजनीतिक दलों या फिर प्रत्याशियों ने चाहे जितनी बिछाई हो किन्तु नये मतदाताओं ने हर बार इन समीकरणों को मजा ही चखाया है। कभी राजनीतिक तो कभी जातीय, कभी क्षेत्रीय तो कभी स्थानीय। किसी का भी बस यहां नहीं चला। अब जबकि फिर चुनाव का समय निकट आ रहा है फिर से समीकरण बनते बिगड़ते नजर आ रहे है, लेकिन यह जिले की चारों विधानसभाओं में कितने कारगर हो पाते हैं फिलहाल इसका भविष्य तय नहीं है।

जिले में करीब 1 लाख नए मतदाता एवरेज लगभग एक विधानसभा में 25 हजार नए मतदाता जुड़े हैं। सरकारी आंकड़ों की मानें तो सबसे अधिक नए मतदाता कटनी मुड़वारा और विजयराघवगढ़ विधानसभा में बढ़े हैं। इन नए मतदाताओं का रुख किसी भी समीकरण को बना और बिगाड़ सकता है। युवा और महिलाओं का रुझान जिले में अब तक किये गए सभी सर्वे में बीजेपी को लाभ पहुंचाता नजर आ रहा है जबकि 35 वर्ष या उससे अधिक के मतदाताओं के वोट बंटता दिख रहा है मतलब ये 50-50 रहेंगे। फिर बारी आती है 50 प्लस के मतदाताओं की।

इन मतदाताओं का झुकाव कांग्रेस की तरफ ज्यादा दिख रहा है। जाति का फेक्टर पहले ही यहां कोई तुरुप का पत्ता नहीं रहा। ऐसे में नए जुड़े मतदाता किसी भी प्रत्याशी का भाग्य तय करने में सक्षम हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपने अपने हिसाब से नए, विशेष तौर पर युवा मतदाताओं को साधने की फिराक में हैं। इस मामले में भाजपा युवा मोर्चा के भरोसे है तो कांग्रेस युवक कांग्रेस के। यही नहीं कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई तो खुलकर कांग्रेस के पक्ष में है जबकि भाजपा समर्थित अभाविप आरएसएस की रणनीति के हिसाब से बैक सपोर्ट में जुटा है।

परिषद ने छात्र संघ चुनाव में एकतरफा जीत हासिल कर भाजपा के लिए युवा वोटर का रुझान काफी हद तक अपने पक्ष में करने का काम कर दिया है। दूसरी ओर एनएसयूआई ने सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलन्द कर काफी हद तक युवाओं को जोड़ने की कोशिश की है। कटनी में तो कहा यह भी जाने लगा है कि एनएसयूआई और युकां ही कांग्रेस को जीवित रखे है। बहरहाल कटनी जिले की चारों सीटों में नए जुड़े मतदाता और आने वाले समय मे जुड़ने वाले मतदाताओ की संख्या यहां परिणाम को प्रभावित करने में सक्षम है शायद यही कारण है कि भाजपा इन नए मतदाताओं के प्रति कांग्रेस से कहीं ज्यादा बेफिक्र है। जिले में तकरीबन एक लाख नये मतदाता प्रत्याशी का भाग्य तय कर सकते हैं बशर्ते इन्हे साधने में जो भी सफल हो जाए ।

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