डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्र के पास गुरुवार को एक पत्र पहुंचा, जिसमें लिखा था कि वह भय्यू महाराज का विश्वसनीय सेवादार है लेकिन मौत के भय से नाम उजागर करना मुमकिन नहीं है। वह महाराज की मौत का राज जानता है और जिम्मेदार को सजा भी दिलवाना चाहता है। गुप्त सेवादार के मुताबिक भय्यू महाराज पिछले दो साल से मानसिक तनाव में थे। डॉ. आयुषी से शादी के बाद वे अकेला महसूस करने लगे थे। उनकी दूसरी पत्नी ने निगरानी करना शुरू कर दिया था। वह आश्रम और घरों में होने वाली बैठकों की जानकारी लेने लगी थी। महाराज से जुड़े हर व्यक्ति और उनके पास आने वालों का हिसाब सेवादार और नौकरों से रखने लगी थी।

वह महाराज की पहली पत्नी माधवी के बारे में चर्चा करने पर भड़क जाती थी। घर में लगी उसकी तस्वीरों को हटवा दिया था। उन्होंने कुहू से बात करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। महाराज को कई बार करीबियों से छुपकर बातें करना पड़ती थी। डॉ.आयुषी ने मां रानी और पिता अतुल शर्मा को इंदौर बुलाया और सिल्वर स्प्रिंग फेज-2 में मकान दिलवा दिया। भाई अभिनव और चाचा उमेश शर्मा को आश्रम में काम पर लगवा दिया। उमेश तो आश्रम से 50 हजार रुपए महीना वेतन भी लेने लगा था। पत्र में यह भी लिखा है कि डॉ. आयुषी महाराज की प्रॉपर्टी (आश्रम और बंगले) हथियाना चाहती थी। इन सब वजहों से महाराज तनाव में रहने लगे। घर के माहौल के कारण उनकी बहनों और बहनोइयों ने आना बंद कर दिया। तनाव इतना बढ़ा की महाराज को आत्महत्या करना पड़ी।

गोली की आवाज क्यों नहीं सुनाई दी –

गुप्त सेवादार ने लिखा है कि घटना के कुछ देर पहले डॉ. आयुषी घर से कॉलेज गई थी लेकिन ऐनवक्त पर लौट आई। उस वक्त घर में कई सेवादार मौजूद थे लेकिन किसी ने भी गोली की आवाज नहीं सुनी। पत्र में घर और आश्रम की अंदरूनी बातों का जिक्र किया गया है। इससे यह बात स्पष्ट है कि पत्र लिखने वाला महाराज का करीबी या आश्रम व घर से जुड़ा व्यक्ति ही है।

तथ्यों की जांच होगी –

पत्र गोपनीय और गुमनाम है। फिर भी उसमें लिखे तथ्यों की सच्चाई जांचने का आदेश दिया है।

– हरिनारायणचारी मिश्र, डीआईजी

आश्रम और घर से जुड़े बहुत सारे लोग हैं जो घर बिगाड़ने की फिराक में हैं। पत्र लिखने वाला भी घर का व्यक्ति है। वह नहीं चाहता कि सब कुछ सामान्य हो। पत्र में लिखी बातों में जरा भी सच्चाई नहीं है।

– रानी शर्मा, डॉ. आयुषी की मां

मैंने करीब 30 लोगों के बयान लिए हैं लेकिन किसी ने इस तरह के आरोप नहीं लगाए।

– मनोज रत्नाकर, सीएसपी व जांच अधिकारी