मेंढक की आत्मकथा: हां मैं वो मेंढक जिसकी जबरदस्ती शादी करवा दी गई…

अजब गजब। बच्चों की परवरिश के मामले में हम आप इंसानों से अधिक प्रोग्रेसिव हैं. अंडे से बच्चा बनते ही हम उसे आजाद छोड़ देते हैं. वो अपने फैसले खुद लेता है. हां, शादी करना उसके हाथ में नहीं होता, वो तो इंसान ही जबरदस्ती करवा देते हैं.

इन दिनों हर तरफ मेरे ही जलवे हैं. चाहे नेता हों या मीडिया वाले, हर तरफ मेरी ही बातें हो रही हैं. दरअसल मानसून और मेरा रिश्ता ही कुछ ऐसा है. मैं मेंढक हूं और बीते कुछ दिनों से देश के बहुत से हिस्सों में मेरी शादी की धूम है. लोगों का ऐसा मानना है कि मेरी शादी करवा देने से बारिश अच्छी होगी! वैसे जबरदस्ती शादी करवाने की यह प्रथा सिर्फ मेंढकों तक ही तो सीमित नहीं है, है न?

खैर मैं मुद्दे से बिना भटके अपनी कहानी आपको सुनाता हूं. अब जब हर तरफ मेरा ही जलवा है तो मैंने सोचा कि मैं भी अपनी ऑटोबायोग्राफी लिख ही दूं क्योंकि आपमें से बहुत से लोग हमें देखकर हमसे तेज उछल पड़ते हैं. लेकिन हमारे बारे में ऐसे बहुत सी बातें हैं जिनके बारे में जानकर आप हमसे डरना छोड़कर हमें भी सम्मान से देखने लगेंगे. क्या आपको पता है कि हम मेंढक आपको मैनेजमेंट और प्लानिंग की सीख भी दे सकते हैं? लेकिन जब मुद्दा हमारी शादी का ही गर्म है तो शुरुआत मैं वहीं से करता हूं.

आखिर क्यों करवाई जाती है हम मेंढकों की शादी!

हिंदू मान्यताओं में मेंढकों को बहुत इज्जत दी जाती है. हमें मानसून लाने वाला एजेंट माना जाता है. कहा जाता है कि हम मेंढकों की शादी करवाने से बारिश के देवता इंद्र देव बहुत खुश होते हैं और सूखी जमीन पर घनाघन बारिश के रूप में अपनी कृपा बरसाते हैं. लेकिन मुझे आजतक समझ नहीं आया कि हमारी शादियां उसी दौरान क्यों करवाई जाती हैं जब मौसम विभाग ने पहले से ही मानसून के आने की भविष्यवाणी कर दी होती है. खैर, पूरी गर्मियों में तो हम गायब ही रहते हैं, लोगों की पकड़ में मानसून की दस्तक के साथ ही आते हैं.

बुंदेलखंड का इलाका हमारे देश में बहुत गर्म और सूखा माना जाता है. इसीलिए सदियों से वहां यह मान्यता चली आ रही है कि धूमधाम से अगर हमारा विवाह करवाया गया तो किसानों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरने के लिए बादल खूब बरसेंगे. अब ये कितना सच है कितना नहीं, यह तो मेरे छोटे से दिमाग में नहीं घुसा, आप लोग समझदार हैं, समझ लें.

असम प्रदेश तो जानते ही होंगे आप? देश के उत्तर-पूर्व में है. वहां चावल की खेती खूब होती है. चावल की फसल के लिए चाहिए बारिश और बारिश के एजेंट माने जाते हैं हम. बस इसीलिए वहां भी घर-घर में हर साल हमारी शादियों का ऐसा जश्न होता है कि किसी लड़के-लड़की की शादी में भी क्या ही होता होगा. मुझे तो लगता है ये सब अंधविश्वास है. आपको क्या लगता है?

आपको यकीन नहीं होगा न इस बात पर लेकिन ये सच है. मैं और मेरे भाई-बहन डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी मच्छरों से होने वाली बीमारियों से आपकी रक्षा करते हैं. कैसे? इसकी टेक्नीक है. अब आप बताइए डेंगू, मलेरिया कैसे होता है? जब आपके घर के आस-पास कहीं मच्छर अंडे दे दें. हमारा काम होता है इन अंडों और पनपते हुए मच्छरों को खाना. अरे, हमें उनका स्वाद अच्छा लगता है भाई! इसीलिए पुराने जमाने में हम मेंढकों को कभी मारा नहीं जाता था. जब से हमारी संख्या कम हुई है, खुद ही देख लीजिए मच्छर कितने बढ़ गए हैं, है कि नहीं?

बदलते वक्त को आपसे ज्यादा देखा है हम मेंढकों ने:

हम मेंढक जीवों की ‘अम्फिबियन’ क्लास के वासी है. यानी हम लोग पानी में भी रहते हैं और जमीन पर भी. हम दरअसल जमीनी और पानी के जीवों के बीच की कड़ी हैं. हमसे नीचे वाले जीव जैसे मछलियां सिर्फ पानी में ही रह सकते हैं, जमीन पर नहीं और हमसे ऊपर की क्लास वाले जीव जैसे इंसान, पक्षी वगैरह पानी में नहीं रह सकते. एक तरह से हमने पानी और जमीन, दोनों ही तरह की दुनिया देखी है. हमारी त्वचा बहुत स्लिपरी यानी फिसलन वाली होती है. हमारे शरीर में सांस लेने के लिए मछलियों की तरह ‘गिल’ भी होते हैं और इंसानों की तरह फेफड़े भी. है ना कमाल की बात.

सर्दियों और गर्मियों में कहां गायब हो जाते हैं हम?

अरे भाई, आप तो गर्म खून वाले लोग हो, बदलते मौसम में आपके शरीर का तापमान नहीं बदलता. लेकिन हम मेंढक, छिपकलियां, सांप और दूसरे ऐसे जीव ठंडे खून वाले होते हैं. मतलब ये कि मौसम बदलते ही हमारे शरीर का तापमान भी बदल जाता है. ठंड में खून जमने लगता है, गर्मियों में उबलने लगता है. इसलिए खुद को सुरक्षित रखने के लिए हम लोग सर्दियों के आने से पहले ही 3-4 महीने के हिसाब से भोजन इकठ्ठा करते हैं और किसी ठंडे से गड्ढे या गुफा में छिप जाते हैं. इस प्रक्रिया कोहाइबरनेशन कहा जाता है. इसी तरह जब गर्मियां बहुत बढ़ जाती हैं तो हम फर एक बार किसी ठंडे कोटर या पानी में छिप जाते हैं. इस प्रक्रिया को एस्टिवेशन कहते हैं. इस लुका-छिपी में हमारा पूरा साल बीत जाता है. इसीलिए जैसे ही बारिश का मौसम आता है, हम भी आप लोगों की तरह रोमांटिक हो जाते हैं.

कैसे ढूंढते हैं प्रजनन के लिए अपना साथी:

हम अपने साथी को गाकर इम्प्रेस करते हैं, ठीक आपमें से कुछ लोगों की तरह. बस अंतर यह है कि आप अरिजीत सिंह के गाने गाते हैं और हम अपने खुद के लिखे और कंपोज किए हुए. जिस आवाज को आप टर्राना समझते हैं, वो दरअसल हम अपनी मेंढकी को आकर्षित करने के लिए गा रहे होते हैं.

कैसे होता है मेंढक में प्रजनन

अधिकतर जानवरों के मामले में प्रजनन फीमेल के शरीर के भीतर होता है. लेकिन जैसे बाकी मामलों में हम सबसे हटके हैं, इस मामले में भी हमारा हिसाब-किताब अलग है. मेंढकी अपने अंडे को शरीर से बाहर पानी में उत्सर्जित कर देती है. मेंढक उसके ऊपर जाकर अपना स्पर्म डाल देता है. बस, पानी में ही वो अंडा हमारे बच्चे में बदल जाता है. बच्चों की परवरिश के मामले में हम आप इंसानों से अधिक प्रोग्रेसिव हैं. अंडे से बच्चा बनते ही हम उसे आजाद छोड़ देते हैं. वो अपने फैसले खुद लेता है. हां, शादी करना उसके हाथ में नहीं होता, वो तो इंसान ही जबरदस्ती करवा देते हैं.