भगवान सत्यनारायण विष्णु भगवान का ही एक रूप हैं, जिसका उल्लेख स्कन्द पुराण में मिलता है। भगवान विष्णु ने खुद देवर्षि नारद को इस व्रत का महत्व बताया है। कलयुग में सबसे सरल, प्रचलित और प्रभावशाली पूजा भगवान सत्यनारायण की ही मानी जाती है।

सत्यनारायण पूजा की खास बातें

सत्यनारायण व्रत कथा के दो भाग हैं, पहले व्रत-पूजन और दूसरा सत्यनारायण की कथा। कहते हैं कि कलियुग का सबसे कल्याणकारी व्रत है। इनकी पूजा कम से कम सामान और बहुत सरल तरीके से की जा सकती है। इनकी पूजा में गौरी-गणेश, नवग्रह और समस्त दिक्पाल भी शामिल हो जाते हैं।

भगवान सत्यनारायण की पूजा करने का सबसे अच्छा समय किसी भी माह की पूर्णिमा को होता है। हालांकि, सत्यनारायण की कथा में यह भी कहा गया है कि जिस किसी भी दिन मनुष्य भक्ति एवं श्रद्धा से युक्त हो, इस कथा को कर सकता है।

इन उद्देश्यों के लिए सत्यनारायण भगवान की पूजा की जाती है

– गृह शान्ति और सुख समृद्धि के लिए इनकी पूजा विशेष लाभ देती है।

– ये पूजा शीघ्र विवाह के लिए और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए भी लाभकारी है।

– ये पूजा संतान के जन्म के अवसर पर और संतान से जुड़े अनुष्ठानों पर बहुत लाभकारी है।

– विवाह के पहले और बाद में सत्यनारायण की पूजा बहुत शुभ फल देती है।

– आयु रक्षा तथा सेहत से जुड़ी समस्याओं में इस पूजा से विशेष लाभ होता है।