जबलपुर डीआरएम से फोन पर कहा-आप घर में सो रहे हैं, हम यहां परेशान हैं

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जबलपुर। बेपटरी हो चुके ट्रेनों के एसी से पैसेंजर परेशान हो चुके हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि रेलवे आखिर कर क्या रहा है। अब तक प्लेटफार्मों पर गुस्से का इजहार कर छोटे कर्मचारियों से नोकझोंक करने वाले पैसेंजर आला अफसरों को नींद से जगाकर अपनी परेशानी बताने से भी नहीं झिझक रहे हैं। ऐसा ही एक वाकया सोमवार की सुबह 5 बजे जबलपुर रेलवे स्टेशन पर हुआ।

सुबह पौने 5 बजे ट्रेन नंबर 15646 गुवाहाटी-एलटीटी का एसी खराब होने से नाराज एक पैसेंजर ने सीधे डीआरएम मनोज सिंह के मोबाइल पर फोन कर कहा- आप घर पर सो रहे हैं, यहां हम परेशान हैं, आप यहां आएं। पैसेंजर की कॉल के बाद हड़कंप मच गया।

आनन-फानन में इलेक्ट्रिकल विभाग की टीम को ट्रेन का एसी सुधारने के लिए भेजा गया। एसी में खराबी के कारण ट्रेन 15 मिनट की देरी से रवाना हुई। इसी तरह सोमवार की शाम पौने 5 बजे जबलपुर पहुंची ट्रेन नंबर 12167 एलटीटी-वाराणसी का एसी खराब होने के कारण पैसेंजरों ने प्लेटफार्म पर जमकर हंगामा किया। इस ट्रेन के एसी को सुधारने में 1 घंटा लगा।

असिस्टेंट इंजीनियरों की टीम बनाई

पिछले कुछ समय से ट्रेनों के एसी खराब होने की शिकायतें बढ़ने से डीआरएम परेशान हैं। अब उन्होंने इसकी समीक्षा शुरू कर दी है। वह हर शिकायत की खुद ही मॉनीटरिंग कर रहे हैं। जबलपुर स्टेशन पर इलेक्ट्रिकल विभाग की असिस्टेंट इलेक्ट्रिकल इंजीनियर स्तर की टीम बनाई गई है। यह टीम शिकायत मिलने पर तत्काल इसे दूर करेगी।

हालातः सिर्फ जबलपुर में टीम, बाकी स्टेशनों में एक्सपर्ट नहीं

मंडल के इलेक्ट्रिकल विभाग के मुताबिक जबलपुर स्टेशन पर ही उनके पास एसी कोच सुधारने वाले तकनीशियन और एक्सपर्ट हैं। अन्य स्टेशनों पर एक्सपर्ट नहीं हैं। कटनी में दो तकनीशियन हैं, लेकिन वह साधारण परेशानी ही दूर कर सकते हैं। सतना, रीवा, मैहर, नरसिंहपुर, दमोह, सागर स्टेशन पर यदि शिकायत मिले तो इसे दूर करने में मुश्किल आती है।

परेशानीः शिकायतों का अंबार, रेलमंत्री को सीधे ट्वीट

जबलपुर से 24 घंटे के दौरान 105 से ज्यादा पैसेंजर ट्रेनें गुजरती हैं। इनमें से रोजाना 10 से 15 ट्रेनों में एसी बिगड़ने की शिकायत मिल रही है। पैसेंजर स्टेशन पर ट्रेन रोककर विरोध-प्रदर्शन, विवाद करने से लेकर रेलमंत्री, जीएम और डीआरएम से सीधे शिकायत कर रहे हैं, जिससे रेल अधिकारी परेशान हैं। एसी मेंटेनेंस का जिम्मा मंडल स्तर पर इलेक्ट्रिकल विभाग के अंतर्गत आता है, लेकिन इन दिनों अधिकारी कोच से ज्यादा ट्रैक के इलेक्ट्रिफिकेशन पर जोर दे रहे हैं।

कारणः स्पेशल में लगा दिए कोच, सुधारना ही विकल्प

पश्चिम मध्य रेलवे के पास जो भी अतिरिक्त कोच थे, उन्हें 16 स्पेशल ट्रेनों में लगा दिए गए हैं। यही वजह है कि एसी कोच खराब होने पर भी उन्हें दौड़ा दिया जाता है। पहले ऐसे मामले में कोच बदल दिया जाता था, लेकिन अब हालात यह है कि मेंटेनेंस के दौरान इस समस्या को या तो दूर कर दिया जाता है या फिर खराब कोच से ही ट्रेन चला दी जाती है। गोंडवाना एक्सप्रेस में हुई घटना की यही वजह सामने आई है।

समाधानः डीआरएम हर शिकायत पर खुद रख रहे नजर

गोंडवाना, ओवरनाइट, चित्रकूट जैसी ट्रेनों में एसी बिगड़ने के बाद डीआरएम अब खुद एसी से जुड़ी शिकायत की मॉनीटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने इलेक्ट्रिकल विभाग की टीम के साथ बैठक कर यह जाना कि एसी की शिकायत किन स्टेशनों पर दूर हो सकती है। डीआरएम इन दिनों रेलवे हेल्पलाइन नंबर 182, 138 के अलावा ट्वीट, फेसबुक पेज या फिर ऑनलाइन मिलने वाली शिकायतों पर नजर रख रहे हैं।

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