सर्चिंग के दौरान SAF जवान की मौत, परिजनों ने जताया पुलिस पर संदेह

चित्रकूट। चित्रकूट के बटोही जंगल में अपनी टीम के साथ डकैत बबली कोल की तलाश में गए एसएएफजवान सचिन्द्र शर्मा की मौत के मामले में पुलिस पर गंभीर आरोप लग रहे हैं. मृतक जवाक के परिजनों का आरोप है कि पुलिस तथ्यों को बदलकर पेश कर रही है. परिजनों के अनुसार शहीद सचिन्द्र के सभी साथी अलग-अलग बयान दे रहे हैं, जिससे सचिन की मौत संदेहास्पद होती जा रही है.

सतना जिले के बटोही के जंगलों में एसएएफ के जवान का शव मिलने के बाद उसकी मौत का राज गहराता जा रहा है. पुलिस ने जो कहानी मृतक जवान के परिजनों को बताई है वह परिजनों के गले से नीचे नहीं उतर रही हैं. मामले में सचिन्द्र के परिजनों ने बताया कि 23 जून को उसे सतना बुलाया गया और कहा कि सचिन्द्र जंगल में सर्चिंग के दौरान लापता हो गए हैं. इसकी सूचना मिलने पर सचिन्द्र के अन्य परिजन भी सतना पहुंच गए.

मृतक जवान सचिन्द्र शर्मा के बेटे देवेश शर्मा ने बताया कि उनके पिता के शव के पास से रायफल व शरीर से वर्दी, बेल्ट एवं जेब से अन्य सामान गायब मिला. यह सब देखकर उनकी मौत पर संदेह हुआ, जिसके बाद उनकी टीम में शामिल अन्य जवानों से पूछताछ की तो सभी के बयान भिन्न थे, जिससे सचिन्द्र की मौत के मामले में संदेह गहरा गया है. मृतक के परिजनों ने इसकी शिकायत भिंड एसपी से भी की है.

चित्रकूट के बटोही के जंगल में एसएएफ जवान सचिन्द्र शर्मा अपनी टीम के साथ डकैत बबली कोल की तलाश में जंगल मे गए थे, जहां से वे लापता हो गए. इसके बाद 24 को जंगल में सर्चिंग के दौरान ही जवान का शव मिला था. सर्चिंक के दौरान सतना एसपी राजेश हिंगड़कर की कार्यप्रणाली की परिजनों ने प्रशंसा की है.