अरुण यादव से बोले दिग्विजय : सब्र से मिलती है बड़ी जवाबदारी

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भोपाल। अरुण। तुम्हें एक बात कहना है। सन् 1985 में मैं कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष था। 88 में मुझे हटाया गया। कई दिनों तक कुछ नहीं मिला। तुम्हें पद से हटाया तो बुरा मत मानना। कुछ लिया जाता है तो बड़ा पद भी मिलता है। बिना सब्र के राजनीति में कोई आगे नहीं बढ़ सकता। कांग्रेस एक समुद्र है। जहां अपना रास्ता खुद निकालना पड़ता है।

यह बात कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह ने मंगलवार को कही। सिंह तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुभाष यादव की पांचवीं बरसी पर उनके गृहग्राम बोरावां में स्मरण सभा में बोल रहे थे।

सिंह ने जहां स्व. यादव के साथ बिताए लम्हों को याद किया, वहीं पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव व विधायक सचिन यादव को बच्चों की तरह नसीहत दी। इस मौके पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ व चुनाव समिति के चेयरमैन ज्योतिरादित्य सिंधिया का प्रस्तावित दौरा ऐन वक्त पर रद्द हो गया। बारिश की वजह से उनका हेलीकॉप्टर नहीं आ सका।

अपनी लकीर लंबी करो

सिंह ने कहा कि अरुण और सचिन उनके परिवार के हैं। उन्हें बढ़ाने की जवाबदारी सभी की है। मैं इस जवाबदारी को निभाऊंगा। साथ ही उन्होंने कहा कि विपक्ष के लोग उन पर प्रेम बरसाते हैं। क्या-क्या नहीं कहते? अरुण को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा आमटे ने एक बार कहा था – किसी और से प्रतिस्पर्धा मत करो। अपनी लकीर खुद लंबी खींचो। मैंने नर्मदा यात्रा कर अपनी लकीर लंबी कर ली।

धरोहर को बढ़ाना चुनौती

सिंह ने कहा कि सुभाष यादव सहकारिता के क्षेत्र में अव्वल थे। उनके जैसा कोई दूसरा व्यक्ति नहीं देखा। उनकी धरोहर तुम्हें मिली है। अरुण व सचिन में उम्मीद और विश्वास है। उनकी धरोहर को आगे बढ़ाने के लिए चुनौती उनके पास है।

गलती की तो गर्दन भी पकड़ेंगे

सिंह ने दोनों भाइयों पर स्नेह जताते हुए कहा कि आगे बढ़ते रहो। हर अच्छे काम पर वे उनकी पीठ थपथपाएंगे। और हां, यदि गलती की तो गर्दन भी पकड़ेंगे। उन्होंने दोनों भाइयों को माइक के पास बुलाकर प्रोत्साहित किया।

मतभेद थे मनभेद नहीं

जहां सिंह ने अरुण व सचिन यादव को नसीहतें दी, वहीं वे सुभाष यादव के साथ बिताए लम्हों को याद कर भावुक भी हो गए। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक दोनों ने साथ काम किया। दोनों के रिश्ते भाई से बढ़कर थे। कई उतार-चढ़ाव साथ देखे। दोनों के बीच चर्चा में कई बार मतभेद बने, पर मनभेद नहीं रहे। उन्होंने कहा कि सुभाष भाई मन के बहुत भोले थे।

बिना देखे करता था दस्तखत

उन्‍होंने कहा कि यादव की सहकारिता के क्षेत्र में सबसे बड़ी पकड़ थी। उनकी फाइलों और दस्तावेजों पर कभी मैंने सवाल नहीं किए। वे जो फाइल रखते, मैं कहता- सुभाष भाई आपने सही लिखा होगा और बिना देखे हमेशा दस्तखत किए।

अभी भी हूं युवा

सिंह ने सन् 1980 के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि सुभाष भाई पहली बार सांसद बने। उस वक्त वे स्वयं अर्जुनसिंह के मंत्रिमंडल में शामिल थे। उस वक्त हम युवा थे। मजाकी अंदाज में कहा कि मैं आज भी युवा ही हूं। उन्होंने अपेक्स बैंक और सहकारिता का जिक्र किया। निमाड़ में नर्मदा जल से नहरों का जाल बिछाने का श्रेय सुभाष भाई को जाता है।

भावुक हुए अरुण यादव

स्मरण सभा के दौरान अरुण यादव ने सभी का आभार माना। इस दौरान वे पिता को याद कर बेहद भावुक हो गए। सांसद कांतिलाल भूरिया ने कहा कि सुभाष यादव को सहकारिता के क्षेत्र में हमेशा याद रखा जाएगा। पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि स्व. यादव ने सहकारिता के क्षेत्र को मजबूत कर आर्थिक विकेंद्रीकरण किया।

राज्यसभा सांसद राजमणि पटेल ने कहा कि स्व. यादव ने विषम परिस्थितियों में विचलित न होकर संघर्ष किया। सभा में स्व. यादव की पत्नी दमयंतीबाई, बेटे अरुण व सचिन, भाई राजेंद्र, कृष्णलाल पटेल, संजय कपूर, जुबेर खान, सुरेंद्र चौधरी, जिलाध्यक्ष झूमा सोलंकी, बड़वानी जिलाध्यक्ष सुरेंद्रसिंह राठौर आदि मौजूद थे। संचालन केके मिश्रा ने किया।

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