University की प्रयोगशाला के कर्मचारी कैमिकल को ड्रग्स के रूप में कर रहं इस्तेमाल

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ग्वालियर : जीवाजी विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला में छात्रों के शोध के लिए मौजूद कैमिकल का उपयोग कर्मचारी नशे के लिए कर रहे हैं। इसकी पुष्टि के लिए फूड एंड टैक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के हैड ने एक कर्मचारी का पकड़कर ब्लड टेस्ट किया। जिसमें एथिल अल्कोहल की पुष्टि हुई है।

आनन फानन में लैब सहायक दीपक कुमार को सस्पेंड कर दिया गया। साथ ही कर्मचारी से एथिल अल्कोहल का इंजेक्शन भी बरामद किया गया है। इस इंजेक्शन को कर्मचारी की ब्लड रिपोर्ट के साथ सैंपल के रूप में कुलसचिव को भेजा गया है। कुलपति ने जीवाजी विश्वविद्यालय में मौजूद सभी लैब को आदेश दिया है कि वह अपने कर्मचारियों का ब्लड टेस्ट कराएं। जिससे पता लग पाए कि कौन सा कर्मचारी यूनिवर्सिटी की लैबों का कैमिकल का उपयोग नशे के रूप में कर रहा है।

दरअसल जीवाजी विश्वविधालय में मौजूद सभी 38 लैबों में 20 से 22 कर्मचारी संदिग्ध हैं, जो लैब में मौजूद कैमिकल को नशे के रूप में उपयोग करते हैं। जिन को लेकर जांच चल रही है। आपको बता दें जीवाजी विश्वविधालय की अध्यनशालाओं में हर साल करीब 60 लाख रुपए के कैमिकल का उपयोग होता है। इसमें लाइट सर्जरी एसिड, कैसेट मार्फिन, कोडीन, डायजेपाम जैसे महंगे ड्रग भी शामिल है।

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