मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। यहां देश में आपातकाल के खिलाफ भाजपा के विरोध के तहत आयोजित कार्यक्रम विचार संबोधन सभा में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई ये समझने की गलती ना करे कि हम सिर्फ देश में आपातकाल लगाने वाली कांग्रेस सरकार की आलोचना करने के लिए काले दिन का स्मरण करते हैं। हम देश की वर्तमान और भावी पीढ़ी को जागरूक करना चाहते हैं, हम लोकतंत्र के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को सज्ज रखने के लिए इसका स्मरण करते हैं

पीएम ने कहा कि देश ने कभी सोचा तक नहीं था कि सत्ता सुख के मोह में और परिवार भक्ति के पागलपन में, लोकतंत्र और संविधान की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले लोग हिन्दुस्तान को जेलखाना बना देंगे। एक परिवार के लिए संविधान का किस प्रकार से साधन के रूप में उपयोग किया जा सकता है, शायद ही ऐसा उदाहरण कहीं मिल सकता है।

पीएम ने कहा कि आज के युवा को इस बात की बिल्कुल जानकारी नहीं है कि इमरजेंसी के समय में क्या हुआ था। वो नहीं जानते कि आजादी के बिना जीना क्या होता है।

पीएम ने कांग्रेस पर हमला जारी रखते हुए कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनके खिलाफ कोर्ट में भ्रष्टाचार के आरोप लग सकते हैं और उन्हें जमानत भी लेनी पड़ेगी। इसलिए अब वो न्यायपालिका को डराने के लिए महाभियोग चलाने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी मानसिकता आज भी वैसी ही है जैसी आपातकाल के दौरान थी।

पीएम बोले कि जब-जब कांग्रेस पार्टी को और खासकर एक परिवार को अपनी कुर्सी जाने का संकट महसूस हुआ है तो उन्होंने चिल्लाना शुरू किया है कि देश संकट से गुजर रहा है, देश में भय का माहौल है और देश तबाह हो जाने वाला है और इसे सिर्फ हम ही बचा सकते हैं।

पीएम ने कहा कि आपातकाल के समय नयायपालिका को भयभीत कर दिया था, जो लोकतंत्र के प्रति समर्पित थे उनको मुसीबत झेलने के लिए मजबूर कर दिया गया था और जो लोग एक परिवार के पक्ष में थे उनकी पांचों उंगलियां घी में थी।

पीएम ने कहा कि मैं अनुभवी पत्रकार कुलदीप नायर जी का सम्मान करता हूं, उन्होंने इमरजेंसी के दौरान आजादी की लड़ाई लड़ी। हो सकता है वो हमारे कड़े आलोचक हों लेकिन मैं उन्हें सलाम करता हूं। उस दौरान जब किशोर कुमार ने कांग्रेस के लिए गाने से इन्कार कर दिया तो उनके गीतों के प्रसारण पर रोक लगा दी गई।

पीएम ने आगे कहा कि जिस पार्टी के अन्दर लोकतंत्र ना हो उनसे लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता की अपेक्षा नहीं की जा सकती है। जिन्होनें देश के संविधान को कुचल डाला हो, देश के लोकतंत्र को कैदखाने में बंद कर दिया हो, वो आज भय फैला रहे हैं कि मोदी संविधान को खत्म कर देगा। लोकतंत्र के प्रति आस्था को मजबूत करने के लिए हमें आपातकाल के इस काले दिन को भूलना नहीं चाहिए और भूलने देना भी नहीं चाहिए।