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यशभारत सर्वे:केंट में भाजपा तो पाटन में कांग्रेस को बढ़त

जबलपुर, नगर प्रतिनिधि। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही टिकिट की दावेदारी से लेकर जीत-हार के समीकरणों पर चर्चा और कयासों का बाजार गर्म हो गया है। हर कोई जानना चाहता है कि किस सीट से कौन जीत रहा है और कौन हार रहा है। किस पार्टी के पक्ष में क्या माहौल है। ऐसे में यशभारत द्वारा सभी सवालों के जवाब जानने के लिए जिले की आठों विधानसभा में सर्वे कराया गया है जिसमें कुछ चौंकाने वाले‌ तो कुछ आशातीत परिणाम सामने आए हैं। जिसे यशभारत में विधानसभावार प्रकाशित किया जायेगा।

कैंट में खिल सकता है कमल

इतिहास के पन्नों में लम्बे समय तक हाथ का साथ देने वाली कैंट विधानसभा सीट पर स्वर्गीय दादा ईश्वरदास रोहाणी ने भाजपा की जीत की जो लकीर खींची थी वह उनके जाने के बाद भी कमजोर होती नहीं दिख रही है। सर्वे के आंकड़ों की मानें तो शहर की चार विधानसभा सीटों में एकलौती सीट है जहां से भाजपा के लिए जीत के संकेत साफ-साफ मिल रहे हैं। माना जा रहा था कि दादा के जाने के बाद वर्तमान विधायक को मिली सिम्पैथी वोट इस बार कहीं न कहीं भाजपा से छटक जायेगी लेकिन सर्वे में ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है। वोटर का मिजाज कहीं न कहीं भाजपा के प्रति झुकाव रख रहा है।

यदि कांग्रेस के बात करें तो वह इस बार पुरानी हार से बाहर निकल के नई ऊर्जा और पूरी ताकत के साथ चुनाव लडऩे की तैयारी कर रही है। लेकिन क्षेत्र का मिजाज और दावेदारों का क्षेत्र विशेष में सीमित होना कांग्रेस को मजबूती नहीं दे पा रहा है। इसके अलावा प्रत्याशाी की अनिश्चितता भी कांग्रेस के प्रति झुकाव रखने वाले लोगों के मन में संशय की स्थिति निर्मित कर रही है जिसका फायदा कहीं न कहीं भाजपा को मिलेगा। वैसे भाजपा में भी बागियों और भीतरघात करने वालों की कमी नहीं है परन्तु संगठन का डंडा उन्हें खुलकर बगावत करने नहीं दे रहा है। विकास के साथ साथ क्षेत्रीय लोगों से सतत संपर्क भाजपा के लिए मददगार साबित होगा।

सबसे महत्वपूर्ण बिन्दु जो सर्वे के दौरान सामने आया वो यह है कि कैंट विधानसभा में भाजपा ने वर्ग विशेष की वोट को अपनी तरफ बांधकर रखा है। जिसमें बिखराव बहुत कम देखने को मिल रहा है। पॉस कालोनियों के साथ विकसित इलाकों में थोड़ा एन्टी इन्कमबेंसी है परन्तु भाजपा की मुख्य ताकत है यहां का मध्य और निम्र मध्य वर्ग जो भाजपा के साथ अभी भी जुड़ा हुआ है। जिसमें कांग्रेस की सेंधमारी कामयाब नहीं हो  पा रही है। जिसके चलते कैंट से कमल खिलने की उम्मीद सर्वे में जादा दिख रही है।