विदाउट फिटनेस चैलेंज हम भी 50 वर्षीय फिटिंग का उदाहरण बन गये

इसी बहाने (आशीष शुक्‍ला)। जन्म दिन इस दिन का नाम सुनकर किसी का भी ही मन प्रफुल्लित हो जाता है। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण आज हर शख्स का भी जन्म दिन पता लग जाता है।

और तो और जो अपने जीवन के वर्षों को छिपाने की कला में पूर्ण माहिर है वे भी छिपा नहीं पाते। युवा दिखना भला किसे अच्छा नहीं लगेगा, मगर ये फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सप है कि उम्र के पड़ाव को उजागर करने के लिए हर वक्त सजग ही रहता है। खुद को पता हो न हो लेकिन हफ्ते भर पहले से ही नोटिफिकेशन बार-बार जन्म दिन की याद दिलाते रहते हैं।

बहरहाल फ़िटनेस चेलेंज के इस दौर में हम भी 50 वर्षीय फिटिंग का उदाहरण बन ही गए। किसी के फिटनेस चैलेंज जैसे भले ही हमने कोई वीडियो शेयर करके वाहवाही न बटोरी हो लेकिन जीवन के इस अर्धशतकीय पारी में उतार-चढ़ाव गम और खुशी भी हमारे साथ हमराही बने रहे।

जन्म दिन आते ही मैसेज से मिलती शुभकामनाओं से मन को तसल्ली मिलना स्वाभाविक है, किंतु इस तसल्ली में भी आंखें अपनों की भीड़ में तलाशती रहतीं हैं वो चेहरा जिसे देख मानों सारा संसार मिल जाता था। पिता अरुण के साथ युवा जीवन का वो पहला जन्म दिन इन 50 वर्षों में भी किसी भी जन्म दिन से अलग और जीवन की पूंजी के समान है।

अरुण के इस आशीष को आज भी उस कर्णप्रिय आवाज की तलाश है जो कानों में आते ही कर्तव्य बोध करा देती थी। असमय हमें यूँ छोड़ कर जिंदगी देने वाले ही चले गए तो सहसा मन उदास और सामने पहाड़ जैसा दिखने लगा। इस कठिन वक्त में मां सुशीला की ममतामयी छांव अखण्ड बन कर आशीष को सुशील बनातीं रहीं। जीवन के सुख-दुख का मानो हमारी जिंदगी में एक पारिवारिक सदस्य जैसा ही नाता रहा। इस दौर में प्रत्येक अपनों परायों ने हर कदम पर साथ दिया।

हमें तो कभी भी महसूस ही नहीं हुआ कि कौन अपना है और कौन पराया। स्नेह ने हमारे जीवन में अपनों और परायों के महत्व को ही बौना कर दिया। जद्दोजहद के बीच सामाजिक जीवन का महत्व हमें हर वक्त यह अहसास कराता रहा कि व्यक्ति को जीवन में सामाजिक रह कर ही मुकाम हासिल करने का विचार रखना चाहिए। असामाजिक जिंदगी भी क्या खाक जिया करती हैं।

आज हमारे घर मे खुशियों ने उपकृत किया है। यह सौभाग्य ही है कि याशिका के रूप में घर आंगन में नन्ही परी की मधुर मुस्कान ने हमें अपार प्रसन्नता दी है। जीवन के हर कठिन वक्त में समस्त स्नेही स्वजनों के स्नेह ने हमारे लिए संबल का काम किया। चुनौतियां चाहे जितनी भी कठिन हों धैर्य सूझबूझ और आशीष से इन पर विजय पाई जा सकती है।

वक्त ठहरता नहीं बस वक्त के लिए इंसान ही ठहर जाता है। वक्त के साथ चलने से प्रत्येक समस्याओं का हल मिल ही जाता है। आज मेरे जन्म दिन के इस सुखद क्षण में मेरे जीवन को कई मुकाम एक साथ हासिल हुये। माता पिता के आशीर्वाद की छांव और आपके स्नेह की डोर सदैव मजबूत बनी रहे बस ईश्वर से हर वक्त यही चाहते हैं।