आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर ट्रांसपोर्टर्स, कारोबार पर पड़ सकता है बड़ा असर

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बिजनेस डेस्कः किसानों की दस दिनों की हड़ताल खत्म होने के बाद आज (सोमवार) से देशव्यापी ट्रांसपोर्टर्स ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। पेट्रोल-डीजलों के दाम ने जिस तरह बीते दिनों उछाल लगाई है ट्रक चालक और मालिक उससे खफा हैं यही कारण है कि ये हड़ताल बुलाई गई है। इसके अलावा थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का दाम बढ़ने से भी ट्रक वाले नाराज़ हैं।

Yashbharatइस दौरान ट्रांसपोर्टर्स खान-पान और कुछ अन्य आवश्यक चीजों की आपूर्ति करते रहेंगे लेकिन कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सामानों की ढुलाई बंद रहेगी। ऑल इंडिया कन्फेडरेशन ऑफ गुड्स ऑपरेटर्स एसोसिएशन (AICOGOA) की अगुवाई में हड़ताल का आह्वान किया गया है। हालांकि, ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) जैसे अन्य संगठनों ने सोमवार की बजाए अगले महीने से हड़ताल शुरू करने का प्रस्ताव रखा था।

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ढुलाई पर दिखेगा असर
AICOGOA के प्रेसिडेंट बी चन्ना रेड्डी का कहना है कि डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी, थर्ड पार्टी प्रीमियम में इजाफा और जीएसटी से जुड़ी परेशानियों के चलते इस हड़ताल का ऐलान बीते महीने अप्रैल में ही कर दिया गया था। उससे पहले सरकार के साथ हुई कई बैठकों का दौर नाकाम रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक संगठन के सेक्रेटरी कौसर हुसैन ने बताया, देशभर में लोडिंग शनिवार (16 जून) को ही बंद कर दी गई थी और ऐसे में ढुलाई पर असर एक दो दिन में ही दिखने को लगेगा।

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जरूरी चीजों की जारी रहेगी आपूर्ति 
हालांकि, इस दौरान दूध, सब्जियां, दवाइयां जैसी जरूरी चीजों की आपूर्ति जारी रहेगी। ऑल इंडिया फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि हड़ताल का असर कर्नाटक, केरल, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल, उत्तराखंड और दिल्ली एनसीआर पर होगा। फाउंडेशन के कोऑर्डिनेटर एसपी सिंह के मुताबिक जरूरी वस्तुओं के हड़ताल से बाहर होने के चलते इसका असर कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सप्लाई पर ही पड़ेगा। हालांकि, अगर हड़ताल लंबी चली तो कुछ श्रेणी के उपभोक्ताओं को सामान की किल्लत भी हो सकती है।

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ट्रांसपोर्टर्स का आरोप है कि सरकार उनसे डीजल से रोड टैक्स के रूप में 8 रुपए प्रति लीटर और टोल टैक्स के रूप में 8 रुपए प्रति किलोमीटर वसूल कर रही है। इसके कारण ट्रांसपोर्ट और उनसे जुड़े उद्योगों को करीब 3,000 करोड़ का रोजाना का नुकसान हो रहा है।

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