सूरजकुंड में RSS की बैठक में सामने आई नई ‘परेशानी’, संगठन मंत्रियों को याद दिलाईं जिम्‍मेदारियां

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दिल्ली।  दिल्ली से सटे सूरजकुंड में आरएसएस और बीजेपी के संगठन मंत्रियों की तीन दिन की माथापच्ची का निचोड़ यह रहा कि अगर मिशन 2019 को सफल बनाना है तो फिर संघ के नुमाइंदों को और ज्यादा जोर लगाना पड़ेगा. सूरजकुंड की बैठक में मंथन इस बात पर हुआ कि संगठन मंत्रियों का रोल क्या हो।

जाहिर है संघ का शीर्ष नेतृत्व इस बात को लेकर चिंतित है कि जिन राज्यों में सरकारें अरसे से चल रहीं हैं वहां सत्ता और संगठन ऐसे मिल गए हैं कि अगर सरकार ना रहे तो सब तितर-बितर ही हो जाए. ऐसी जगहों पर संगठन मंत्रियों का रोल भी सिमटता जा रहा है. तीन दिनों की बैठक में देश भर से आए संघ के लगभग 100 नुमाइंदों के लिए नसीहतों और निर्देशों का पिटारा खोल दिया गया. बैठक में संघ के नंबर 2 यानि सरकार्यवाह भैय्याजी जोशी भी मौजूद थे.

तीन दिनों तक चली इस बैठक पर बीजेपी आलाकमान की भी खास नजर थी. खुद अमित शाह ने एक दिन इन संगठन महामंत्रियों के साथ बिताया तो पीएम मोदी ने एक दिन अपने निवास पर रात्रि भोज के लिए उन्हें आमंत्रित किया. मोदी और अमित शाह जानते हैं साल 2014 के लोकसभा चुनावों में मोदी लहर थी तो गांव-गांव तक संघ के कार्यकर्ता भी पहुंचे हुए थे. सब जानते हैं मिशन 2019 के लिए कोई लहर नहीं है और ऐसे में सरकार के कामकाज और संगठन की ताकत ही नैय्या पार लगाएगी.

सूत्र बताते हैं कि संघ के शीर्ष नेतृत्व की चिंता इस बात को लेकर थी कि कई राज्यों से ऐसी रिपोर्ट आने लगी है कि वहां के संगठन मंत्री सरकार के कामकाज का हिस्सा बनते जा रहे हैं. बिना किसी का नाम लिए बैठक में निर्देश दिए गए कि संघ के नुमाइंदे मॉनिटरिंग एजेंट ना बने. केन्द्र के साथ साथ देश के लगभग 25 राज्यों में बीजेपी या फिर मिलीजुली सरकारें हैं.

संघ को लगने लगा है कि जिन राज्‍यों में कई सालों से  बीजेपी की सरकार हैं वहां सत्‍ता और संगठन मिल गए हैं. संघ चाहता है कि संगठन सरकार के पिछलग्गू ना बने.

संघ के आला नेताओं ने साफ-साफ कहा कि संगठन महामंत्री संगठन पर ध्यान केन्द्रित करें. पीएम मोदी और अमित शाह के उदाहरण भी दिए गए. सूत्र बताते हैं कि संगठन महामंत्रियों को कहा गया कि जैसे अमित शाह अध्यक्ष बनने के बाद पूरे देश के दौरे पर रहते हैं और लोगों से सीधा संवाद कायम करते हैं कुछ उसी तर्ज पर संगठन मंत्री भी अपने प्रभार वाले राज्य का जमकर दौरा करें. उन्हे निर्देश दिए गए कि राज्य की राजधानियों में बैठने के बजाए उन्हें भी जिला और ब्लॉक स्तर तक भ्रमण करते रहना होगा और अपने कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कायम करना होगा.

ऐसा करने से संगठन में चल रही खामियों और कमियों का पता भी चल पाएगा और उन्हें दुरुस्त भी किया जा सकता है. सूत्र के मुताबिक संगठन महामंत्रियों को उनकी जिम्मेदारियों की भी याद दिलाई गई. उन्हें कहा कि बीजेपी का अध्यक्ष तो हर तीन साल पर बदल जाता है लेकिन संगठन महामंत्री तो कई वर्षों तक काम करते हैं. वो सक्रिय रहें तो संगठन की व्यवस्था चाक चौबंद रहेगी.

संदेश और संकेत साफ है कि संघ से बीजेपी में आए प्रचारक नेतागिरी भूल कर संगठन मजबूत करने के काम में लगें जिसके लिए संघ ने उन्हें बीजेपी में भेजा है.

जाहिर है मिशन 2019 को सफल बनाना है तो संगठन महामंत्रियों को अभी से ही कड़ी मशक्कत करनी होगी. यूपी को लेकर संघ की चिंता साफ नजर आई. सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में यूपी पर संघ का विशेष ध्यान होगा. संकेत हैं कि पूरे राज्य को 4 हिस्सों में बांटा जा सकता है और 4 संगठन महामंत्रियों के हवाले किया जा सकता है. इससे राज्य के सभी हिस्सों तक संगठन पर नजर रखी जा सकेगी जो लखनऊ में बैठ कर संभव नहीं होती थी. महाराष्ट्र में संगठन महामंत्री बदले गए हैं. तय है कि बदलाव का यह काम जल्दी ही पूरा होगा ताकि संगठन को मजबूती दी जा सके.

साफ है कि पूरी जोर बीजेपी में काम कर रहे संघ के प्रचारकों की कार्यशैली बदलने पर था. संघ का शीर्ष नेतृत्व जानता है कि कड़ी मेहनत के बाद जनता ने उनकी सरकार को पूर्ण बहुमत दिया है. इसलिए उसकी सफलता और विफलता में ही संघ का भविष्य छिपा है. इसलिए जोर संगठन पर ही है ताकि संगठन महामंत्री सत्ता के दबाव से बचते हुए संगठन की चिंता करें. अगर दौरे चलते रहे तो पीएम मोदी की सरकार के काम काज को आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाना मुश्किल काम नहीं होगा.

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