‘एग्जाम ऑन डिमांड’ लागू हुआ तो छात्र अपनी मर्जी से दे सकेंगे परीक्षा

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बिलासपुर। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई क्रांति आने वाली है। इसके तहत यूजीसी ने एग्जाम ऑन डिमांड व्यवस्था लागू करने की कवायद शुरू कर दी है और देशभर के सभी कुलपतियों से सुझाव मांगा है। इसमें विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए सालभर इंतजार नहीं करना पड़ेगा, अपनी मर्जी से परीक्षा दे सेकेंगे। शिक्षाविदों का मानना है कि यह सिस्टम लागू हुआ तो उच्च शिक्षा में क्रांतिकारी कदम होगा।

कॉलेज-यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को अब पढ़ाई में एकदम नया अनुभव होगा। केंद्र सरकार के निर्देश पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) अब स्टूडेंट्स को अपनी सुविधा के हिसाब से परीक्षा की तारीख तय करने की सुविधा पर विचार कर रहा है। इस पर प्रस्ताव भी तैयार कर लिया गया है।

विश्व के कई देशों में एग्जाम ऑन डिमांड की व्यवस्था है। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय समेत पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय और बिलासपुर विश्वविद्यालय के कुलपतियों के पास इसकी कॉपी है। कुलपतियों का कहना है कि नई व्यवस्था से छात्र-छात्राएं तनाव मुक्त रहेंगे।

उन्हें अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का मौका मिलेगा। हालांकि अभी इस पर अंतिम मुहर नहीं लगी है। आयोग ने ग्रेडिंग, क्रेडिट ट्रांसफर, टेक्नोलॉजी का ज्यादा इस्तेमाल, स्पेशल कोर्सेज के लिए विशेष ट्रीटमेंट, इन तमाम विषयों पर फोकस किया है। इसी कड़ी में यह एक और कदम है।

व्यवहारिक दिक्कतें भी आएंगी

सीएमडी कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ.पीएल चंद्राकर का कहना है कि यह भारत की प्राचीन परंपरा का हिस्सा है, जिसे आगे बढ़ाना चाहिए। कौशलेंद्र राव विधि महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.सतीश तिवारी का कहना है कि नई व्यवस्था से व्यवहारिक दिक्कतें भी आएंगी।

कम छात्र संख्या वाली संस्थाओं को परीक्षा लेने में आसानी होगी, लेकिन बीयू जैसे विश्वविद्यालय के लिए आसान नहीं होगा। परीक्षा पद्धति में नए सिरे से सुधार की जरूरत होगी। डीपी विप्र कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य प्रो.विमल पटेल का कहना है कि छात्रों का समय बचेगा और शिक्षकों का कद बढ़ेगा।

दो साल का होगा स्नातक

एग्जाम ऑन डिमांड की व्यवस्था के तहत मेधावी छात्र तीन साल का कोर्स दो साल में भी पूरा कर पाएंगे। भारत की कुछ संस्थाओं मे यह व्यवस्था अभी लागू है। शिक्षाविद इसे एक अच्छी पहल बता रहे हैं। ऐसे में अगर नई व्यवस्था लागू हुई तो संभाग के सैकड़ों मेधावी विद्यार्थियों को इसका फायदा होगा, लेकिन कॉलेज-यूनिवर्सिटी के लिए बड़ी चुनौती भी होगी।

पांच प्रमुख समस्याएं

  • 12 महीने लगातार परीक्षा की व्यवस्था बड़ी चुनौती होगी।

  • परीक्षा का स्वरूप व प्रश्नपत्र तैयार करने की समस्या।

  • गोपनीयता को लेकर शिक्षकों पर पूरा दारोमदार रहेगा।

  • ग्रेडिंग व नंबर के बजाए नॉलेज पर ध्यान देना होगा।

  • नकल व फॉल्स केस का निपटारा, दखल बढ़ेगी।

  • एग्जाम ऑन डिमांड व्यवस्था लागू करने यूजीसी ने सुझाव मांगा है। अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। निश्चित तौर पर यह उच्च शिक्षा में क्रांतिकारी कदम होगा। स्टूडेंट तनाव मुक्त रहेंगे। वहीं विश्वविद्यालयों के लिए इसे सही ढंग से संचालित करना बड़ी चुनौती होगी। स्टूडेंट संख्या सबसे महत्वपूर्ण होगी। डॉ. बंश गोपाल सिंह, कुलपति, पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विवि

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