बेरंग रहेगी ईद: एमपी में मदरसा शिक्षकों को दो साल से नहीं मिला वेतन

Advertisements

नेशनल डेस्‍क। चुनावी साल में शिवराज सरकार ने सभी वर्गों को खुश करने के लिए सौगात की झड़ी लगा दी है. लेकिन शायद सरकार मुस्लिम शिक्षकों को भूल गई है. केंद्र सरकार से मिले अनुदान के बावजूद राज्य सरकार ने दो सालों से मदरसा शिक्षकों का वेतन नहीं दिया है.

एमपी में दूसरे साल भी पांच हजार से ज्यादा मदरसा शिक्षकों और उनके परिवारों की ईद फीकी रहेगी. सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भले ही रमजान के पवित्र महीने में इफ्तार पार्टी दी हो, लेकिन मध्यप्रदेश मदरसा बोर्ड से पंजीकृत मदरसा शिक्षकों को बीते दो साल से वेतन नहीं मिला है.

बताया जा रहा है कि मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त मदरसों को भारत सरकार एसपीक्यूईएम योजना के तहत मानदेय राशि जारी करती है. मानव संसाधन विकास मंत्रालय साल 2016-2017 और 2017-2018 की राशि जारी भी कर चुका है. राज्य सरकार इस राशि में अपना कुछ अनुदान मिलाकर मदरसा शिक्षकों को वेतना देता है. हैरत की बात है कि मोदी सरकार की तरफ से अनुदान की राशि आने के बावजूद शिवराज सरकार ने अभी तक शिक्षकों को राशि का भुगतान नहीं किया है.

एमपी के वो मदरसे जिन्हें नहीं मिला लाभ- 1672
-3 शिक्षकों पर रहती 1 मदरसे की जिम्मेदारी

-2016-2017 और 2017-2018 का नहीं मिला वेतन
-1 साल का मिलता है 72000 रुपए वेतन
-2 साल का 72 करोड़ 23 लाख 4 हजार रुपए वेतन रूका

मदरसा शिक्षकों को एक साल में एक मुश्त राशि वेतन के तौर पर 72 हजार रुपए मिलती है. दो सालों से ये राशि नहीं मिली, तो मध्यप्रदेश मदरसा शिक्षक कल्याण संघ की शिकायत पर विदेश मंत्री कार्यालय ने लोक शिक्षण संस्थान के आयुक्त को पत्र लिखकर शिक्षकों को राशि जारी करने के निर्देश दिए.

इसके अलावा भी शिक्षकों के संगठनों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ तमाम मंत्रियों, मदरसा बोर्ड और कई अफसरों को ज्ञापन भी सौंपा, लेकिन किसी ने इन शिक्षकों की नहीं सुनी. आरोप है कि सरकार ने केंद्र से मिले मदरसा शिक्षकों की राशि को किसी दूसरे मद में खर्च कर दी है. इस मामले में मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा है कि केंद्र से आई राशि प्रक्रिया के तहत जल्द मिल जाएगी.

इतना ही नहीं पिछले साल सीएम शिवराज ने मदरसा बोर्ड के लिए जो घोषणाएं की थी. वो भी पूरे नहीं किए हैं. 22 सितंबर 1998 को स्थापित हुए मदरसा बोर्ड के सुधार के लिए शिवराज ने पिछले साल कई घोषणाएं की थी, जो अभी तक अमल में नहीं आ पाई हैं.

Advertisements