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सुबह की GOOD NEWS; ट्रेनों और स्टेशनों में मिलेगी मेडिकल सुविधा

नई दिल्ली। रेलवे अब सभी ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर 88 जीवन रक्षक दवाइयां, चिकित्सकीय उपकरण और इंजेक्शन मुहैया कराएगी। जबकि पहले केवल रेलवे परिसर में बस एक फर्स्ट एड बॉक्स ही उपलब्ध होता था। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि इलाज की इन सामग्रियों में प्रसूति (डिलेवरी) से संबंधित किट, ऑक्सीजन सिलेंडर, लैरिंजोस्कोप्स, कैथेटर्स, सीरिंज, टैबलेट, स्प्लिंट्स, सभी आकार और साइज की बैंडेज, आइंटमेंट और यहां तक कि ऑक्सीजन डिफिब्रलेटर्स (करंट के जरिए हार्ट बीट नियंत्रित करने का उपकरण) भी उपलब्ध होंगे।

रेल अधिकारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने एम्स की एक कमेटी बनाई है जो रेल यात्रियों के इलाज के लिए आपात स्थिति में जरूरी देखभाल की निगरानी करेगी और उस पर अपनी रिपोर्ट देगी। साथ ही उनकी तरफ से सूचीबद्ध सभी चिकित्सकीय उपकरणों को भी यात्रियों के लिए मुहैया कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 3-4 लाख रुपये के ऑक्सीजन डिफिब्रलेटर्स को छोड़कर सभी चिकित्सकीय उपकरण व सुविधाएं रेलवे ने चरणबद्ध तरीके से मुहैया करा दी हैं। अप्रैल से चरणबद्ध तरीके से ट्रेनों में नए मेडिकल बॉक्स उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही सभी रेलवे स्टेशनों पर फोल्डिंग स्ट्रेचर भी उपलब्ध होंगे।

ट्रेन में सफर कर रहे डॉक्टरों की मदद लेने के साथ ही आवश्यकता पड़ने पर नजदीकी स्टेशन में आपात देखभाल की सुविधा भी दी जाएगी। कुल 162 ट्रेनों को चिन्हित करके उन्हें ऐसे चिकित्सकीय बॉक्स दिए गए हैं। इन फर्स्ट एड बॉक्स में 58 तरह की दवाइयां और फर्स्ट एड से जुड़ी अन्य सामग्रियां मौजूद हैं। इसके अलावा, देश भर के रेलवे के अस्पतालों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ा गया है ताकि वह यात्रा के दौरान बीमार पड़े रेल यात्रियों को देख सकें।

आपात स्थिति की सूरत में स्टेशन मास्टर या स्टेशन मैनेजर को यह अधिकार दिया गया है कि वह तत्काल रेलवे मेडिकल अफसर को नोटिस भेजकर मरीज का इलाज करने के लिए बुला सकता है। इतना ही नहीं, मूलभूत चिकित्सकीय देखभाल के लिए टीटी, गार्ड और स्टेशन मास्टरों को प्रशिक्षित किया गया है।

जयपुर-कोटा ट्रेन में एक रेल अधिकारी की मौत काड्रियक अरेस्ट से होने की खबर पर ट्रेनों में यात्रियों के इलाज की सुविधा के लिए एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने एम्स की यह कमेटी बनाई थी।

ट्रेनों में सादे कपड़ों में निगरानी का प्रस्ताव

रेलवे के नए प्रस्ताव के अनुसार वह सादे कपड़ों में रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों पर अपने ऐसे अफसर तैनात करेगा जो ट्रेन में दी जा रही सुविधाओं और सेवाओं की निगरानी करेंगे और उसके आधार पर इन सेवाओं को रेटिंग देंगे। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार “मिस्ट्री शॉपर” कहे जाने वाले यह लोग सामान्य यात्री ही लगेंगे। लेकिन यह सुविधाओं, भोजन, स्टॉफ के बर्ताव और ट्रेनों व स्टेशनों की गुणवत्ता पर नजर रखेंगे। इस प्रणाली को शुरुआती बीसवीं शताब्दी में अमेरिका में विकसित किया गया था।

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