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गौ तस्करी के मामले में थाना प्रभारी पर भी हुई कार्रवाई

कटनी। पिछले सप्ताह सुर्खियों में रहे गौ तस्करी के मामले में कुठला थाने में पदस्थ आरक्षक के निलंबन के बाद अब शाहनगर थाने के टीआई को भी निलंबित कर दिया गया है। इतने गंभीर मामले में कार्यवाही अभी तक केवल निलंबन और अटैचमेंट तक ही सीमित है जबकि इस मामले में दोषियों के विरूद्ध अपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए था।

साफ जाहिर है कि गौ तस्करी के इस अपराध में पुलिस की भूमिका गौ तस्करों के सहयोगी के रूप में सामने आ रही है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह इंद्रानगर बायपास पर कुठला थाने के दो आरक्षकों द्वारा गौवंशीय मवेशियों से लदा एक ट्रक पकड़ा गया था।

ये मवेशी शाहनगर से ट्रक में लोडकर हरियाणा ले जाये जा रहे थे। कुठला थाने के आरक्षकों द्वारा ट्रक पकड़े जाने के कुछ ही देर बाद शाहनगर थाना प्रभारी मौके पर पहुंच गए थे। जहां कुठला थाने के एक आरक्षक और शाहनगर थाना प्रभारी के बीच झूमाझटकी और गाली-गलौज भी हुई थी।

मामले की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दिये जाने के बाद वरिष्ठ अधिकारी कुठला थाने पहुंच गए थे जहां मवेशियों को लेकर जा रहे ट्रक को जप्त किये जाने के साथ-साथ पकड़े गये गौ तस्कर पर भी अपराध दर्ज किया गया था। कुठला थाने के आरक्षक और शाहनगर थाना प्रभारी ने एक दूसरे पर गौ तस्करों को संरक्षण देने का आरोप लगाया था।

प्रारंभिक जांच के बाद थाना प्रभारी से अभद्र व्यवहार के आरोप में पुलिस अधीक्षक अतुल सिंह द्वारा कुठला थाने में पदस्थ आरक्षक अजय दुबे को निलंबित कर दिया गया था। इधर पन्ना एसपी द्वारा शाहनगर थाना प्रभारी रामेश्वर प्रसाद के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल निकलवाई गई।

जिसमें थाना प्रभारी के गौ तस्करों के संपर्क में रहने की पुष्टि हुई है। इस जानकारी के बाद पन्ना एसपी रियाज इकबाल अहमद द्वारा थाना प्रभारी रामेश्वर प्रसाद को लाइन अटैच कर दिया गया है। सवाल यह है कि अगर थाना प्रभारी की गौ तस्करी में संलिप्तता है तो केवल अटैचमेंट की कार्यवाही किसी भी सूरत में पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। होना तो यह चाहिए कि थाना प्रभारी को भी निलंबित कर अपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। इस मामले में पुलिस अधिकारी अभी जांच जारी होने की बात कह रहे।

गौ तस्करी का केन्द्र बना पन्ना और दमोह
बताया जा रहा है कि गौ तस्करी को लेकर कड़े कानून बन जाने के बाद भी पुलिस की मिलीभगत से यह अपराध जारी है। कटनी का पड़ोसी पन्ना और दमोह जिला इस अवैध व्यापार के बड़े केन्द्र बनते जा रहे। पहले गौ तस्करों द्वारा पैदल हंकालते हुए मवेशियों को सीमा पार कराया जाता था पर गौ तस्करों की चौकसी और नाकेबंदी के चलते अब मवेशियों को वाहनों में लोडकर छुपाकर ले जाया जाता है। इस प्रकरण में भी मवेशियों को बुरी तरह ट्रक में भरे जाने के बाद त्रिरपाल लगाकर उसे ढंक दिया गया था जिसके कारण दम घुटन से आधा दर्जन से अधिक गायों की मौत हो गई थी।

अन्य गौवंशियों की हालत भी गंभीर ही पाई गई थी। बताया गया कि पन्ना और दमोह जिले के कुछ पशु व्यापारी गौ तस्करी में भी लिप्त हैं। स्थानीय थाना प्रभारियों को मोटी रकम चढ़ाकर ये गौ तस्करी के काम को अंजाम देते हैं। कई बार एक थाने द्वारा दूसरे थाने की सीमा पार कराने की भी गारंटी ले ली जाती है। ऐसा ही कुछ इस बार भी हुआ था। जिसके चलते शाहनगर और कुठला थाने के बीच यह विवाद हुआ।